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आरक्षण को लेकर फिर फंसा गढ़वाल विवि

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विवि बीएड सत्र 2009-10 को लेकर एक बार फिर असमंजस में फंस गया है। इस बार विवि की राह में बीएड़ प्रवेश परीक्षा में लागू होने वाला आरक्षण एवं वैटेज रोड़ा बन गया है। अब विवि फिर से बीएड प्रवेश में लागू होने वाले आरक्षण को लेकर माथापच्ची में जुट गया है।

गढ़वाल केंद्रीय विवि की बीएड को लेकर परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। बड़ी मुश्किल से अभी हाल में ही विवि प्रशासन ने बीएड के सत्र 2009- 10 को किसी तरह शून्य होने से बचाने की कवायद शुरू की। दिसंबर के अंत तक प्रवेश परीक्षा आयोजित कराने का निणर्य लिया था लेकिन अब विवि के सम्मुख आरक्षण एवं वैटेज का मुद्दा खड़ा हो गया है। विवि तय नहीं कर पा रहा है कि प्रवेश परीक्षा में आरक्षण के कौन से नियम लागू किये जायं और कैसे छात्रों को वैटेज दिया जाय।

गढ़वाल विवि में आरक्षण का मुद्दा शुरू से ही एक गंभीर मुद्दा रहा है और विगत एक वर्ष से छात्र आरक्षण को लेकर आंदोलनरत हैं। इसके बाद कुलपति ने एचआरडी को पत्र प्रेषित कर विवि में छात्रों को एनएसएस, एनसीसी आदि का लाभ दिये जाने के संदर्भ में जानकारी मांगी है। विवि से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विवि बीएड़ प्रवेश में आरक्षण को लेकर दो मानक अपनाने पर भी विचार कर सकता है।

इसके तहत गढ़वाल केंद्रीय विवि के परिसरों के लिए आरक्षण के नियम केंद्रीय होंगे जबकि अन्य संबंध कॉलेजों के लिए राज्य के ही आरक्षण नियम लागू रहेंगे।  विवि के मुख्य परीक्षा नियंत्रक प्रो एलजे सिंह का कहना है कि आरक्षण को लेकर विवि ने अभी तक कोई अंतिम निर्णय नही लिया है और विवि एनएसएस, एनसीसी वेटेज के संदर्भ में यूजीसी को भेजे गये पत्र का भी इंतजार कर रही है। कुलसचिव प्रो एआर नौटियाल ने इस बारे में किसी टिप्पणी से इंकार किया है। 

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