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14 सेकेंड की क्लिपिंग सुनने में 50 घंटे भी कम

मात्र 14 सेकेंड की वीडियो क्लिपिंग से पुलिस-प्रशासन 50 घंटों में भी सीएम पर भद्दी टिप्पणी को नहीं ढूंढ पाया है। कई-कई बार प्ले करके इसे सुनने के बाद प्रशासन एफसी को क्लीन चिट देने की तैयारी में जुटा है। वहीं, विवि भी प्रशासन से कम नहीं है। इसी मामले से जुड़े दो लोगों की छात्रवृत्ति मामले की जांच में उसे दस दिन लगेंगे।

यूपी की मुख्यमंत्री पर भद्दी टिप्पणी पर पुलिस-प्रशासन और विवि किस तरह खेल कर रहे हैं, इसके लिए वीडियो क्लिपिंग ही काफी है। मात्र 14 सेकेंड की इस क्लिपिंग में पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को सीएम पर भद्दी टिप्पणी नहीं सुनाई पड़ रही। बार-बार सुनते हैं, लेकिन सीएम पर की गई टिप्पणी ही सुनाई नहीं देती। यही वजह है कि घटना के 50 घंटे बाद भी भद्दी टिप्पणी अधिकारियों के अभयदान से धुंधली पड़ गई है। पुलिस जांच के जरिए क्लिपिंग से एंगल तलाश रही है, लेकिन दो दिन बाद भी उसे कुछ नहीं मिला। संभव है जांच में ही वीडियो क्लिपिंग बार-बार ट्रांसफर होते-होते अपना मूल रूप ही खो दे और घटना को क्लीन चिट मिल जाए।

दूसरी ओर, विवि की कार्यशैली भी देखिए। पूरे प्रकरण की जांच में विवि के तीन अधिकारियों को दस दिन लगेंगे। यह स्थिति तब है जब छात्रवृत्ति की फाइलें और छात्र दोनों कैंपस में हैं। स्पष्ट है कि विवि की मंशा साफ नहीं है।

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  • Web Title:14 सेकेंड की क्लिपिंग सुनने में 50 घंटे भी कम