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यूपी उपचुनाव में हार से हतोत्साहित नहीं राहुल टीम

यूपी उपचुनाव में हार से हतोत्साहित नहीं राहुल टीम

कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी की युवा ब्रिगेड को हाल ही मे संपन्न उत्तर प्रदेश विधान सभा के उपचुनाव में जबरदस्त पसीना बहाने के बावजूद भले ही फिरोजाबाद को छोड़कर हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन पार्टी की यह नौजवान टोली हतोत्साहित बिल्कुल नहीं है और निशाना अब 2012 के प्रदेश विधान सभा चुनाव पर है। युवा ब्रिगेड जोशो खरोश के साथ राज्य में अपना जनाधार बढ़ाने की रणनीति तैयार करने में जुट गई है।

युवा ब्रिगेड से जुडे़ सूत्रों का कहना है कि 2012 के विधानसभा चुनाव पर राहुल गांधी की नजर टिकी है और इसके लिए उनकी राज्य की 402 विधानसभा सीटों पर पार्टी की मजबूत पकड़ बनाने के लिए दस पर्यवेक्षक नियुक्त करने की योजना है। इस योजना के तहत एक पर्यवेक्षक 40 विधानसभा सीटों का कामकाज देखेगा और इन क्षेत्रों में कांग्रेस का जनाधार बढ़ाने के लिए काम करेगा।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक पर्यवेक्षक अपने क्षेत्र में पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए कार्य योजना तैयार करेगा और समय-समय पर राहुल गांधी को स्थिति से अवगत कराते रहेंगे। पार्टी की रणनीति बहुजन समाज पार्टी को सत्ता से बाहर कर कांग्रेस को सत्ता में लाने की है।

उत्तर प्रदेश और बिहार में कांग्रेस का खोया जनाधार बढ़ाना राहुल गांधी की पहली प्राथमिकता में शामिल है और इसके लिए उन्होंने 15वीं लोकसभा चुनाव के समय ही अपने तेवर दिखा दिए थे, जब उनके कहने पर पार्टी ने दोनों राज्यों में अपने बल पर चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय लिया। उनके इस निर्णय से बिहार में जहां लालू पासवान के तेवर ढ़ीले पड़ गए, वहीं कांग्रेसियों के चेहरे भी खिल आए और दशकों से अलग-थलग पडे़ कार्यकर्ताओं को पार्टी के लिए काम करने का अवसर मिल गया।

इधर उत्तर प्रदेश की फिरोजाबाद लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में कांग्रेस के राज बब्बर ने समाजवादी पार्टी के गढ़ पर सेंध लगाते हुए सपा प्रमुख की बहु डिंपल यादव को जिस तरह से पराजित किया और कांग्रेस महासचिव की सभाओं में जो भीड़ उमड़ी उसने साबित कर दिया कि आने वाले समय में प्रदेश में राहुल का जादू चल सकता है।
कांग्रेस का कोई बड़ा नेता करीब 32 वर्ष बाद चुनाव प्रचार के लिए फिरोजाबाद गया। इससे पहले 1977 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी फिरोजाबाद गई थीं और दशकों बाद इस क्षेत्र में उनके पोते और कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी चुनाव प्रचार में शामिल हुए और वहां के जातीय ध्रुव को तोड़ने में कामयाब रहे।

हालांकि राहुल और उनकी युवा टीम के जोरदार प्रयास के बावजूद विधानसभा के हाल में उपचुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इटावा में पार्टी की जमानत जब्त हुई है और उसके उम्मीदवार को चौथा स्थान मिला। यही स्थिति रारी विधानसभा क्षेत्र की है। वहां भी पार्टी का उम्मीदवार चौथे स्थान पर रहा। कोलअसला में पार्टी आठवें स्थान पर रही। राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र सुल्तानपुर की इसौली में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार ने जोरदार जीत दर्ज की और वहां कांग्रेस उम्मीदवार लगभग 50 हजार मतों से पिछड़ गया। ललितपुर में भी कांग्रेस की स्थिति बहुत अच्छी नहीं रही।

प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस की इज्जत बची रह गई। पार्टी ने लखनऊ उत्तर पश्चिम सीट भाजपा से छीन ली। इस सीट पर कांग्रेस के श्याम सुन्दर शुक्ला विजयी रहे। राज्य की 11 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में कांग्रेस के खाते में एक मात्र यही सीट आई है।

पडरौना में केन्द्रीय मंत्री आरपीएन सिंह की मां मोहिनी देवी चुनाव लड़ीं थीं और वह लगभग 50 हजार मतों के अंतर से हार गई। सिंह इस सीट से विधायक थे लेकिन सांसद बनने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

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