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पाक से फरार हुआ तालिबानी कमांडर फजलुल्लाह

पाक से फरार हुआ तालिबानी कमांडर फजलुल्लाह

पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत के स्वात घाटी में तालिबान कमांडर और मुल्ला रेडियो के नाम से मशहूर मौलाना फजलुल्लाह ने दावा किया है कि वह पाकिस्तानी सेना के चंगुल से फरार हो चुका है और इस समय अफगानिस्तान में पूरी तरह से सुरक्षित है।

मौलाना फजलूल्लाह ने मंगलवार को बीबीसी की उर्दू सेवा के साथ बातचीत में कहा कि वह अफगानिस्तान पहुंच गया है और जल्द ही स्वात घाटी में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू करेगा।

उसने कहा कि जो लोग स्वात घाटी की सफलता का दावा करते हैं उन्हें देश में ड्रोन हमले बंद करवाने तथा अमेरिका की कुख्यात निजी सुरक्षा एजेंसी (ब्लैक वाटर) की गतिविधियों को रोकने के लिए काम करना चाहिए।

फजलूल्लाह ने पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत के सूचना मंत्री इफ्तिखार हुसैन को चेतावनी दी कि उनका भी वही हाल होगा जो नजीबुल्लाह का हुआ था। ज्ञातव्य है कि तालिबान आतंकवादियों ने वर्ष 1996 में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जा करने के बाद तत्कालीन अफगान राष्ट्रपित डॉ. नजीबुल्लाह को फांसी दे दी थी।

अमेरिकी राष्ट्रपित बराक ओबामा के बारे में उसने कहा कि उन्हें अफगानिस्तान में और सैनिक भेजने की कोई जरूरत नहीं है। फजलूल्लाह ने कहा कि पाकिस्तान के हजारो सैनिक पहले से ही इस इलाके में अमेरिकी एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं।

इससे पहले जुलाई महीने में पाकिस्तानी सेना ने दावा किया था कि सैन्य कार्रवाई में मौलाना फजलुल्लाह गंभीर रूप से घायल हो गया है और जल्द ही उसकी मौत हो सकती है। मौलाना फजलुल्लाह के इस बयान से पाकिस्तानी सेना के दावों की सच्चाई उजागर हो गई है।

मौलाना फजलुल्लाह स्वात घाटी में अवैध रूप से निजी एफएम रेडियो स्टेशन भी चलाता था। मुल्ला रेडियो के नाम से चल रहे इस रेडियो पर वह कट्टरपंथी भाषणों से लोगों को एकजुट करता था। वह अपने भाषणों में लड़कियों को शिक्षा देने का कड़ा विरोध करता था।

विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक गायब रहे मौलाना फजलुल्लाह के सामने आने से तालिबान आतंकवादियों का उत्साह और बढ़ जाएगा। मौलाना फजलुल्लाह प्रतिबंधित संगठन तहरीकी नफाजे शिरयते मोहम्मदी (टीएनएसएम) के संस्थापक मौलाना सूफी मोहम्मद का दामाद भी है।

मौलाना फजलुल्लाह ने स्वात घाटी में इस्लामी कानून शरियत लागू करने के लिए तालिबान का गठन किया था। सरकार ने पहले तो स्वात घाटी में शरिया कानून लागू करने को मंजूरी दे दी थी, लेकिन बाद में वह अपने फैसले से पीछे हट गई और वहां पर सैनिक कार्रवाई शुरू कर दी थी।

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