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दो टूक (18 नवम्बर, 2009)

नोएडा फेज-2 में गैस रिसाव के कारण 50 से अधिक लोग बीमार हो गए। इस तरह की घटनाओं को हादसा कहकर पिंड नहीं छुड़ाया जा सकता क्योंकि हर हादसे की जड़ में होती है लापरवाही। यदि जरूरी सावधानी नहीं बरतेंगे, रखरखाव सही नहीं होगा और निगरानी व्यवस्था दुरुस्त नहीं होगी तो ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।

औद्योगिक विकास की राह पर आगे बढ़ती हमारी व्यवस्था को अनुशासित होना ही होगा। यह सही है कि हादसों को रोक पाना संभव नहीं। पर इनकी संख्या जरूर घटाई जा सकती है। इनसानी कारीगरी और तमाम तकनीकी उन्नति का भी एक अहम उद्देश्य है इस तरह की दुर्घटनाओं की संभावना को न्यूनतम करना।

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