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न्यूमोनिया-दमा बजा रहे खतरे की घंटी

न्यूमोनिया और दमा का रोग खतरनाक स्थिति में पहुँच गया है। न्यूमोनिया के बैक्टीरिया ने अब दवाओं से लड़ने वाली प्रतिरोधक क्षमता (मल्टी ड्रग रजिस्टेन्स) तैयार कर ली है। न्यूमोनिया का यह बैक्टीरिया अपनी बढ़ी क्षमता से इस रोग का ग्राफ दस साल से लगातार बढ़ा रहा है। कमोवेश यही स्थिति दमा यानी ब्राँकल अस्थमा(दमा) में भी बन चुकी है। आने वाले समय में डॉक्टर इस रोग को चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं। एक अध्ययन के अनुसार कानपुर में 1.8 प्रतिशत लोग टय़ूबर क्लोसिस के रोगी हैं और लगभग 40 फीसद लोग टीबी के साथ साथ अन्य बीमारियों का संक्रमण लेकर जी रहे हैं।

यह जानकारी जीएसवीएम मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य और हाल ही में इंडियन चेस्ट सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी से नवाजे गए डॉ. एसके कटियार ने दी। डॉ. कटियार ने मंगलवार को तमाम श्वांस सम्बन्धी बीमारियों की तस्वीर रखी। चेतावनी भी दी कि इन बीमारियों को रोकने के लिए अब सामूहिक प्रयास की बेहद जरूरत है। डॉ. कटियार की माने तो कानपुर में लोगों का जिस तरह का रहन सहन है, वह श्वांस सम्बन्धी बीमारियों को और बढ़ा रहा है। पूर्व में किए गए शोध और हाल के अध्ययनों ने इस बात का खुलासा कर दिया है कि कानपुर टीबी के लिहाज से काफी खतरनाक हो गया है।

टीबी एक को होती है, तो दूसरे को आसानी से फैलने की संभावना ज्यादा रहती है। एक-एक कमरे में कई लोगों का रहना इस रोग को और बढ़ा रहा है। यद्यपि शहर में40 और 30 फीसद लोग श्वांस सम्बन्धी बीमारियों के संक्रमण से ग्रसित है। लेकिन उनका इम्यून सिस्टम उन्हें इस रोग से लड़ने की ताकत दे रहा है, जब भी  यह इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, वे श्वांस बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। डॉ. कटियार ने बताया कि न्यूमोनिया और दमा का हाल तो और बुरा है। इनके बैक्टीरिया ने दवा के खिलाफ अपने में प्रतिरोधक क्षमता पैदा कर ली है और यह सब कुछ दवाइयों के बेजा प्रयोग से हो रहा है।

इसलिए इन बीमारियों के इलाज में हमेशा विशेषज्ञों की ही चौखट पर जाना चाहिए। इस खतरनाक स्थिति को देखते हुए  सोसाइटी ने विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम बना दी है। जो लगातार होमवर्क करके  एक ब्लू प्रिन्ट तैयार करेगी। इसी ब्लू प्रिन्ट को केन्द्र सरकार को सौंप कर इन बीमारियों के लिए देशव्यापी कार्ययोजना बनाने और रोकथाम के उपाय करने के सुझाव दिए जाएँगे। इसके साथ ही साथ इण्डियन चेस्ट सोसाइटी युवा डॉक्टरों के लिए एक ज्ञानवर्धन कार्यक्रम की श्रृंखला चलाएगी। सोसाइटी का पूरा ध्यान डॉक्टरों को बेहतर ट्रेनिंग के जरिए समाज की सेवा की नसीहत भी देना है।

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