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अब खेलेगा-कूदेगा तो भी बनेगा नवाब

यह कोई छोटी-मोटी बात नहीं है, सामाजिक बदलाव के लिए एक बड़ी पहल है। उन लाखों स्टूडेंट के सम्मान को सुनिश्चित करने वाला है, जो टेलेंटेड होते हुए भी बचपन से ही बुद्धू होने का तिरस्कार झेलने को मजबूर होते हैं। सीबीएसई बोर्ड का कन्टीन्यूअस एण्ड कंप्रीहेन्सिव इवेलुएशन (सीसीई) रूपी कदम रट्टू और पढ़ाकू स्टूडेंट के जयघोष को कम करने जा रहा है।

सीसीई उन स्टुडेंट को सहेजा जो पढ़ाई में भले ही न फीलगुड.. करते हों, पर अन्य क्षेत्रों मसलन खेलकूद, कला में जय हो.. का परचम लहराते हों। यूँ कहें कि पढ़ाई का नजरिया बदलेगा सीसीई। इससे को-स्कॉलरिस्टक एरिआज (शैक्षणेत्तर) को अहमियत मिलेगी। तनाव, दबाब और विपरीत हालात में मुस्कुराने वालों को तैयार करना होगा शिक्षा का उद्देश्य।

करमदेवी मेमोरियल स्कूल (केडीएमए) सभागार में चल रहा मुट्ठी भर शिक्षाविदें और शिक्षकों का मंथन देखने में बहुत सामान्य सा था। उस मंथन का उद्देश्य व्यापक नहीं अनंत था। माँ-बाप बाथरूम में गुनगुनाते अपने लाड़ले को ताना देना छोड़ देंगे। पढ़ाई में सामान्य पर खिलाड़ी महान भी अब रिजल्ट आने पर सिर नहीं झुकाएँगे।

सीबीएसई बोर्ड का ग्रेडिंग सिस्टम तो जिक्र भर है यह पढ़ाई के पैटर्न का पूरी तरह बदलाव है। रिसोर्स परसन के रूप में लखनऊ से आईं लखनऊ पब्लिक ग्रुप ऑफ स्कूल की एडीशनल डाइरेक्टर आभा भारत शाह ने कहा कि बोर्ड अब सिर्फ स्कोलरिस्टक (पढ़ाई-लिखाई) को ही अच्छे स्टूडेंट होने न होने का मानक नहीं बनाएगा।

ग्रेडिंग सिस्टम के तहत थिंकिंग स्किल, सोशल स्किल और इमोशनल स्किल महत्वूर्ण घटक होंगे। उन्होंने कहा कि अगर कोई विद्यार्थी पढ़ाई में सामान्य है और खेल कूद, डांस या किसी और विधा में बहुत अच्छा है तो उसे सिर्फ इसलिए नजरअंदाज नहीं कर देना चाहिए कि उसके नंबर कम हैं। बोर्ड का लक्ष्य है कि बच्चों को आत्मविश्वास से लबरेज नागरिक के रूप में विकसित किया जाए। पढ़ाई में अगर कोई बहुत अच्छा है और तनाव और विपरीत हालात में काम नहीं कर सकता तो उसकी पढ़ाई के कोई मायने नहीं रह जाते।

चंडीगढ़ से आईं रिसोर्स पर्सन डॉ.राकेश सचदेवा ने कहा कि शिक्षकों को अपना नजरिया बदलना होगा। एक शिक्षक जब किसी विद्यार्थी के बारे में शरारती होने की राय बना देता है तो स्टाफरूम से लेकर स्कूल भर में उसे लेकर वही राय बन जाती है।

शिक्षकों को अपने व्यवहार में बदलाव लाना होगा। ग्रेडिंग के लिए निष्पक्ष और जिम्मेदार भूमिका निभानी होगी। पहली अक्टूबर 2009 से बोर्ड ने नौवीं क्लास में ग्रेडिंग सिस्टम शुरू कर दिया है। दसवीं में लागू करने के लिए देश भर में विचार-विमर्श, चिंतन चल रहा है। कार्यशाला में विभिन्न स्कूलों के प्रिंसिपल-शिक्षकों ने शिरकत की, सुझाव दिए।

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