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जयपुर कांड के बाद भी सो रहा है फायर विभाग व प्रशासन

जनपद में सैमसंग ही नहीं बल्कि 34 बड़ी कंपनियां ऐसी हैं जो खतरनाक गैस व रसायनों का इस्तेमाल अपने यहां करती हैं। इनमें से अधिकांश मल्टीनेशनल कंपनियां हैं। इसके अलावा 100 छोटी ऐसी कंपनियां भी हैं जहां तेजाब सहित खतरनाक केमिकल व गैस का उपयोग होता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन कंपनियों में क्या जांच होती है और आखिरी बार स्थानीय फायर विभाग ने कब जांच की थी, इसका रिकार्ड प्रशासन व पुलिस के पास नहीं है।


जयपुर के पेट्रोल गोदाम अभी ताजा उदाहरण हैं। इसके बाद से सभी प्रदेश सरकार ने फायर विभाग को आदेश दे पेट्रोल पंप, खतरनाक  रसायन की कंपनियों, केमिकल की कंपनियों की जांच के आदेश दिए थे और दोबारा से एनओसी पत्र के लिए कहा था, लेकिन नोएडा प्रशासन ने अन्य मामलों की तरह इसमें अनदेखी की। अभी तक कितनी कंपनियों की किस स्तर तक जांच हुई और किन कंपनियों को एनओसी दी गई इसका कोई भी रिकार्ड पुलिस व फायर के पास नहीं है।


हालांकि एलजी सहित विदेशी कंपनियां अपने यहां विदेशी मानक को ध्यान में रख सभी नियमों का पालन करती हैं और समय समय पर फायर की मोक ड्रिल भी करवाती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर छोटी ईकाई ऐसा कोई कार्य नहीं करती है। यही नहीं इन पर विभाग भी कोई सख्ती नहीं दिखाता। सेक्टर 11 में ही टायर बनाने वाली कंपनी में गत दो वर्षो में तीन बार आग लग चुकी है और वहां अमोनिया जैसी खतरनाक गैस का इस्तेमाल होता है। कभी भी कंपनी को बंद नहीं किया गया, बल्कि तीन दिन बाद ही एनओसी दे उसे चालू करवा दिया गया। इसी तरह सेक्टर 12 के एक मकान में छोटे गैस सिलेण्डर के रिसाव से दुकान में आग लग गई और तीन लोगों की जानें गई, लेकिन आज तक उसकी दुकान बंद नहीं की गई और न ही फायर विभाग द्वारा कोई अभियान चलाया गया।

हमारे स्तर से समय समय पर कंपनियों में मोक ड्रिल कराई जाती है और दिशा निर्देश दिए जाते हैं। कंपनी के पोजेसन देते समय अथॉरिटी सुरक्षा संबंधी एनओसी देती है और हम जांच कर उसे हर बार नवीनीकरण करते हैं। अभी हाल में हमने कुछ कंपनियों की जांच की थी। (लेकिन कितनी और कब इस पर उन्होंने चुप्पी साधी)
महावीर सिंह

चीफ फायर आफिसर
इससे पूर्व गैस व रसायनों से हुए हादसे
सेक्टर-11 में टायर फैक्ट्री में अमोनिया गैस से लगी आग से तीन लोगों की मौत
फेस टू में टीवी बनाने वाली अन्य कंपनी की पिक्चर टूयब फटी,जिससे दो लोग झुलसे

गैस,रसायन व केमिकल का इस्तेमाल होता है
100 से ज्यादा छोटी कंपनियां जनपद है
जनपद में 34 बड़ी कंपनियां जिनमें 14 मल्टीनेशनल कंपनियां है।

गैस रिसाव के बचाव के उपाय
 गैस टेंक को ठंडा रखने के लिए लगातार पानी चलाया जाता रहना चाहिए।
 बिजली की लाइन दूर होनी चाहिए।
गैस टेंक के आस पास काटों की बाड लगाकर पेड़ व पार्क बने होने चाहिए
हर तीसरे माह अर्तराष्ट्रीय स्टेंडर्ड द्वारा इसकी चैकिंग होनी चाहिए
अंजान व्यक्ति को उसके संपर्क से दूर रहना चाहिए
लगातार सुरक्षा गार्ड का पहरा होना चाहिए

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