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ईरान की ऊर्जा

ईरान के विदेशमंत्री मनोचहर मोत्तकी की भारत यात्रा का महत्व इस मायने में तो है ही कि काफी दिनों बाद भारत में ईरान को लेकर उत्साह दिखा, लेकिन मध्य एशिया के बदलते रणनीतिक समीकरणों की दृष्टि से भी इसका महत्व है। जॉर्ज बुश जब अमेरिकी राष्ट्रपति थे, तब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय राजनय में ईरान को अछूत बना कर छोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

अमेरिका के उग्र तेवरों का असर भारत-ईरान रिश्तों पर भी पड़ा था। अब अगर दोनों के बीच गर्मजोशी आ रही है तो यह सभी के लिए अच्छा है, और इसका अर्थ यह है कि बराक ओबामा प्रशासन भी ईरान के प्रति दूसरा रवैया अपना रहा है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जो विवाद है, वह अभी चलता रहेगा। अच्छा यह है कि टकराव की जगह संवाद को अहमियत दी जा रही है। लेकिन ईरान का महत्व पारंपरिक ऊर्जा के नजरिए से बहुत बड़ा है।

अच्छा है कि ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइप लाइन पर फिर कुछ तरक्की हुई है, इससे हमारे विकास में तो सहायता मिलेगी ही, लेकिन यह पाइप लाइन रिश्तों को दुरुस्त रखने में भी बड़ी भूमिका निभाएगी। यह साफ है कि इराक और अफगानिस्तान दोनों समस्याओं के सुलझने में ईरान की बड़ी भूमिका हो सकती है। ईरान की दोनों देशों से सीमाएं लगती हैं और कुछ क्षेत्रों में उसका प्रभाव भी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आतंकवाद के अंतरराष्ट्रीय गोरखधंधे में ईरान की कोई रुचि नहीं हो सकती।

ईरान शिया देश हैं और सुन्नी कट्टरपंथियों से उसे भी दिक्कत है। चूंकि एक बार अमेरिका ने उसे दुश्मन के पाले में धकेल दिया था, इसलिए वह अमेरिका को परेशान करने के लिए इराक और अफगानिस्तान में कट्टरपंथियों की मदद कर रहा था, लेकिन उसके दीर्घकालिक हित अल कायदा जैसे संगठनों से मेल नहीं खाते।

इसके अलावा अफगानिस्तान पहुंचने का पाकिस्तान के अलावा दूसरा रास्ता ईरान से है और ईरान से संबंधों के सुधरने के बाद आतंकवाद विरोधी लड़ाई की पाकिस्तान पर निर्भरता कम हो सकती है। सबसे बड़ी बात यह है कि मध्य एशिया में ईरान से हमारी दोस्ती काफी पुरानी है और इतने महत्वपूर्ण दोस्त से फिर गर्मजोशी के रिश्ते बनना अच्छा है। इन रिश्तों की ऊर्जा से काफी सारी समस्याएं सुलझ सकती हैं।

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