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लीडरशिप की क्षमता

हममें से कितने लोग इस बात को मानते हैं कि लीडर पैदा होते हैं। सर्वेक्षण बताते हैं न तो लीडर पैदा होते हैं और न ही बनाए जा सकते हैं, बल्कि वह लोग लीडर बनते हैं, जिनमें किसी टीम को मजबूती के साथ नेतृत्व कर सकने का जज्बा होता है।  नारायन मूर्ति, बिल गेट्स और मुकेश अंबानी में एक बात समान है। ये वो लोग है जिनके अंदर अवसरों को ढूंढ सकने का हुनर था और किसी टीम का बेहतर तरीके से नेतृत्व दे सकने की क्षमता। साथ ही अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकने का शऊर भी।

इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि किसी कंपनी, प्रोजेक्ट को सफलता दिलाने के पीछे उनका नेतृत्वकर्ता ही रहा है। जहां तक विकसित देशों की बात है तो उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने का श्रेय उनके नेतृत्वकर्ता को ही जाता है। एक बेहतरीन नेतृत्वकर्ता बनने के लिए आपको अपने अंदर कुछ गुणों को विकसित करना होगा।

जीतने की ललक : लीडरशिप महज टीम का नेतृत्व करना और उन्हें प्रोत्साहित करने का काम नहीं है। इसके लिए एट्टीटय़ूड की जरूरत है। यानी आपके अंदर किसी भी परिस्थिति में जीत सकने का हुनर। अकसर कहा जाता है, कि लीडरशिप क्वालिटी पैदा नहीं की जा सकती। यह बात काफी हद तक सही है, लेकिन लीडरशिप क्वालिटी को पॉलिश करके निखारा तो जा ही सकता है।

विजन : लीडरों के अंदर सबसे बड़ा गुण यह होता है, कि वह दूरदृष्टा होते हैं। उन्हें  जानकारी होती है कि उन्हें कब और क्या करना है। वह अपनी योजना पर हमेशा काम करते रहते हैं और उनका मकसद होता है कि अपने लक्ष्य को किसी भी सूरत में पाना।

हिम्मत : लीडर के अंदर जोखिम लेने की क्षमता होती है। वह नए विचारों को जन्म देने का हुनर रखते हैं और बदलाव से पूरी तरह बावस्ता रहते हैं। साथ ही उनमें  क्रांति और वैचारिक बदलाव लाने के फन में वह माहिर होते हैं।

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