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तांबाखाणी सुरंग बनी खतरा

वरुणावत पैकेज के साढ़े छह करोड़ के बजट से बनी तांबाखाणी सुरंग प्रशासन की अनदेखी के चलते दुर्घटना का सबब बनने लगी है। अंधेरा, पानी का रिसाव व धूल-कीचड़ से पटी सुरंग में सफर खतरे से खाली नहीं है।

उत्तरकाशी शहर, ज्ञानसू, जोशियाड़ा, तिलोथ, गंगोरी व मातली को तक पैदल, दुपहिया व चौपहिया वाहनों से आवाजाही करने वाले लोगों के लिए तांबाखाणी सुरंग कभी भी खतरे का कारण बन सकती है। अंधेरी सुरंग में पैदल तो दूर वाहनों में सवार होकर भी जाना भी जोखिम भरा है। सुरंग के ऊपर से निर्माण के दौरान पानी का रिसाव, घटिया गुणवत्ता के साथ ग्राउटिंग, लाइटिंग की व्यवस्था न होने, लाइनिंग का कार्य मुख्य निर्माण से अलग रखने आदि समस्याओं से दो-चार होने के बाद ही सुरंग से सुरक्षित बाहर निकला जा सकता है।

प्रधानमंत्री पैकेज की वरुणावत उपचार योजना के इस महत्वपूर्ण कार्य के प्रति स्थानीय प्रशासन की अनदेखी नागरिकों पर कभी भी भारी पड़ सकती है। ज्ञानसू क्षेत्र में आवाजाही करने वाली महिलाएं, स्कूली बच्चे व दुपहिया वाहन से चलने वाले राहगीरों को सुरंग से सफर करना खतरे को मोल लेना जैसा है। लोक सभा चुनाव के दौरान आनन-फानन में यात्राकाल का बहाना बनाते हुए 26 अप्रैल को प्रशासन ने सुरंग में जिस प्रकार से आवाजाही कराई उससे आज भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

खासकर सुरंग के मध्य भाग में पानी का रिवास होने पर लाइनिंग का कार्य तक नहीं किया, इसे टिन के टुकड़ों से वैल्डिंग कर टल्ले लगा दिए गए हैं। इससे जहां लूज गिरने का भय बना हुआ है, वहीं सुरंग के एंगिल व अन्य को भी खतरा बना हुआ है। सुरंग की लेबल तक न होने से बारिश व अन्य कीचड़ सीधे सुरंग के मध्य भाग में पहुंच रहा है।

व्यापार मंडल अध्यक्ष विष्णुपाल सिंह रावत, ज्ञानसू निवासी दिनेश पंवार, शैलेन्द्र सिंह मटूड़ा, दिनेश भट्ट, नारायण सिंह, छात्रसंघ अध्यक्ष प्रदीप रावत आदि ने बताया कि धूप खिलने पर धूल व बारिश में कीचड़ से सुरंग के भीतर चलना मुश्किल है। सुरंग में अंधेरा व कीचड़ के चलते तीन दुपहिया व एक चौपहिया वाहन भी दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। महिलाओं के साथ छेड़छाड़ व अन्य अपराधों को भी सुरंग न्योता दे रही है।

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