DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बौद्ध काल की ‘किम्मि काला’ है किलनहाई नदी

ऐतिहासिक नगरी कौशाम्बी में शोध छात्रों को एक और सफलता हासिल हुई है। उन्होंने बौद्ध काल की किम्मि काला नदी और इसके किनारे बसे जन्तु ग्राम को भी खोज निकाला है। दावा किया गया है कि आज की किलनहाई नदी ही किम्मि काला है। दिल्ली विश्वविद्यालय के इन शोध छात्रों का दावा है कि  इस नदी का नाम महात्मा बुद्ध ने रखा था। नदी करारी नगर के पश्चिम में बसे दानपुर के पास से होते हुए यमुना नदी में मिली है। बौद्ध धर्म के ‘सुत पिटक’ नामक ग्रन्थ में इस बात का उल्लेख है।

ईसा से छह शताब्दी पहले बुद्धत्व मिलने के नौवें वर्ष महात्मा बुद्ध कौशाम्बी आकर ठहरे थे। उस वक्त जन्तु गाँव में बौद्धों का एक आश्रम था। बताया गया कि बुद्ध ने इस आश्रम में एक रात व्यतीत की थी। सुबह नहाने के लिए वह पास में बह रही नदी पर पहुँचे। नदी में उन्हें काफी जोंक मिले । इसके बाद ही बुद्ध ने नदी का नाम किम्मि काला रखा। बौद्ध धर्म के पवित्र ग्रन्थ ‘सुत पिटक’ में इन बातों का उल्लेख किया गया है।

समय के साथ ही साथ नदी व इसके किनारे बसे जन्तु ग्राम का नाम भी बदल गया। लोग यह भी भूल गए कि यह नदी व गाँव भी जिले में कहीं पर हैं। जिले पर शोध कर रहे दिल्ली के छात्रों ने कड़ी मेहनत कर इन ऐतिहासिक स्थलों को खोज निकाला है। शोध छात्र ने बताया कि कौशाम्बी से तकरीबन 30 किलोमीटर दूर बसे करारी नगर के पश्चिम दिशा में मौजूद दानपुर गाँव के पास से यह नदी निकली है।

नदी चायल तहसील के श्यामपुर गाँव के पास यमुना नदी में मिलती है। दानपुर गाँव के पास ही नदी किनारे जन्तु गाँव था। किम्मि काला नदी का नाम अपभ्रंश होकर किलनहाई में बदल गया जबकि इसके किनारे बसे जन्तु ग्राम को लोग जमदुआ के नाम से जानने लगे हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:बौद्ध काल की ‘किम्मि काला’ है किलनहाई नदी