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सरकारी गोदाम में डम्प मिली तीन हजार बोरी डीएपी

रैक प्वाण्इट से ही समितियों को डीएपी सप्लाई करने के शासन के फरमान के बावजूद पिछले पन्द्रह दिन से तीन हजार बोरी से अधिक डीएपी नैनी के चटकहना की सरकारी गोदाम में डम्प पाई गई। विशेष सचिव कृषि एनके द्विवेदी ने इस गोदाम का निरीक्षण किया तो आश्चर्य चकित रह गए। उन्होंने बारा में भी पीसीएफ का बिक्री केंद्र बंद पाया। इस पर उन्होंने उसे भी सील करने का निर्देश दिया।

डीएपी की समस्या को देखते हुए विशेष सचिव कृषि को जिले की मानीटरिंग की जिम्मेदारी सौपी गई थी। वह सोमवार की रात चटकहना स्थित पीसीएफ गोदाम पहुंचे। उसमें 126 मीट्रिक टन एनपीके, दस मीट्रिक इफ्को की डीएपी तथा 47 मीट्रिक टन आईपीएल की डीएपी डम्प पड़ी थी।

उन्होंने इस बारे में पूछताछ की तो पता चला कि रैक तीन नवम्बर को आया था। इतना सुनते ही वह भड़क गए। विशेष सचिव ने कहा कि अब तो रैक प्वांट से ही खाद आपूर्ति की व्यवस्था कर दी गई है, फिर यह खाद गोदाम तक क्यों लाई गई। गोदाम से भी अधिकतम तीन दिन के भीतर सप्लाई हो जानी चाहिए। इस लापरवाही के लिए उन्होंने पीसीएफ के जिला प्रबंधक से स्पष्टीकरण माँगा है।

गोदाम का निरीक्षण करने के बाद विशेष सचिव नैनी बाजार पहुँचे। उर्वरक के थोक विक्रेताओं के अभिलेखों को देखा। सभी थोक विक्रेताओं ने बताया कि उनके पास डीएपी या अन्य कोई फास्फेटिक खाद नहीं है। मंगलवार सुबह विशेष सचिव जिला कृषि अधिकारी गणेश दुबे के साथ बारा तहसील के पीसीएफ खाद बिक्री केन्द्र पहुँचे। वहाँ गोदाम बंद पाया गया।

विशेष सचिव ने जिला कृषि अधिकारी को इस क्रय केन्द्र को सील करने का निर्देश दिया। इसके अलावा उनसे सारे अभिलेखों की जाँच करने के बाद ही इस केन्द्र को बिक्री की अनुमति देने को कहा। जसरा में साधन सहकारी समिति पर तीन दिन की बजाय पाँच दिन बाद खाद का वितरण किया गया था। समिति के सचिव को भी फटकार लगाई। जसरा बाजार में निजी खाद की दुकान का निरीक्षण किया।

इस दुकान पर रेट बोर्ड नहीं लगा था। वहाँ से लौटकर चाका में एग्रो के खाद व बीज केन्द्र का निरीक्षण किया। इस केन्द्र पर मौजूद किसानों का भी बयान लिया। किसानों ने बताया कि बीज तो मिल रहा है लेकिन डीएपी की समस्या है।

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