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बूढ़ी मां का सहारा छिना, किसी का क्या!

पुलिस ने होश खोया और एक गरीब का बेटा बेमौत मारा गया। टूटा-फूटा मकान, चार बीघा जमीन और बद से बदतर माली हाल, ऊपर से ऐसा सदमा। परवेज की मौत से बूढ़ी मां का कलेजा फट गया है।


परवेज चार भाईयों में सबसे छोटा था। पिता कुर्बान अली की पहले ही मौत हो चुकी थी। विधवा मां राबिया, पत्नी शायदा और दो बच्चाे के साथ परिवार के गुजारे को परवेज बिस्कुट और ब्रेड की सेल्समैनी करता था। रिश्तेदारों ने बताया कि अभी काम मंदा चल रहा था। इस वजह से वह कभा-कभार ही माल की सप्लाई करने निकलता था। सोमवार को यूं ही खेतों पर घूमने चला गया था। वहां कुछ नौजवानों को ताश खेलते देखा तो वह खड़ा हो गया। पता नहीं था, पीछे से पुलिस उसकी मौत बनकर आ रही है।


परवेज की पत्नी शायदा सदमे में सुध-बुध खो बैठी है। मां का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे परिवार में कोहराम मचा है। पुलिस ने सुबह जल्दबाजी में जिस तरह से उसका शव दफन कराया, उससे रिश्तेदार और ज्यादा गुस्से में हैं। पूरा गांव अब पीड़ित परिवार के लिए बीस लाख के मुआवजे, दोषी पुलिसकर्मियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग कर रहा है। परिवारवालों ने पत्रकारों से कहा कि हम इंसाफ लेकर रहेंगे। पुलिस ने हमारे बेकसूर भाई की जान ली है। हम आखिरी दम तक लड़ेंगे।

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