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क्रिकेट की दीवानगी ने चाचा हिंदुस्तानी बना दिया

कहते हैं किसी चीज का जूनून आदमी को दीवाना बना देता है। चाहे वह अपना देश हो या देश का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई खेल। कुछ ऐसा ही जूनून दिखाई देता है ग्रेटर नोएडा वासी सुभाष चंदेल में। क्रिकेट की दीवानगी ने उन्हें चाचा हिंदुस्तानी बना दिया। खुद नहीं खेल पाए तो देश के खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने विदेशों तक पहुंच गए।
गाजियाबाद में शुरू हुए रणजी मैच में तिरंगी पगड़ी, हाथ में तिरंगा झंडा लहराते, भारतीय वेष-भूषा में पहुंचे चाचा हिंदुस्तानी सबसे अलग ही दिखाई दे रहे थे। अब तक सैकड़ों मैच देख चुके चाचा हिंदुस्‍तानी बताते हैं कि बचपन से ही उनके अंदर क्रिकेट के प्रति प्रेम रहा। और इसी दीवानगी की वजह से उन्होंने क्रिकेट खेलना भी शुरू किया। जिला लेबल पर कई मैच जीते भी।

मगर सन् 1990 में किसी दुर्घटना में पैर का फैक्चर होने से वह दोबारा नहीं खेल पाए। इस गम को मिटाने के लिए वह खुद के खर्चे से विदेशों तक मैच देख आए। वह बताते हैं कि 1999 में वह बांग्लादेश, 2001 में शारजाह और 2004 और 06 में पाकिस्तान में हुए अंतराष्ट्रीय मैचों को उन्होंने देखा और तिरंगे बाने में तिरंगा लहराकर अपने वतन के खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया। इसके अलावा बॉस्केट बॉल, हॉकी, फुटबॉल जैसे कई भारतीय खेलों में खिलाड़ियों का हौसला आफजाई कर चुके हैं। खुद अपना विजनेस चलाने वाले चाचा हिंदुस्तानी अब कॉमन वेल्थ गेम देखने की तैयारी कर रहे हैं। वह कहते हैं हर भारतीय के घर में एक क्रिकेटर पैदा हो। और खिलाड़ी में सचिन तेंदूलकर जैसा जूनून पैदा हो। मंगलवार को मैच रद्द होने से वह निराश तो हुए, लेकिन बुधवार को वह मैच का आनंद उठाने जरूर पहुंचेंगे।

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