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गैस अंबानी भाईयों की निजी संपत्ति नहीं हैः सरकार

गैस अंबानी भाईयों की निजी संपत्ति नहीं हैः सरकार

सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अंबानी गैस विवाद में अपनी दलील पेश करनी शुरू की। सरकारी वकील ने कहा कि केजी बेसिन की गैस के बारे में दोनों दोनों भाइयों के बीच कोई भी समझौता हुआ हो पर सरकार उससे बाध्य नहीं है क्यों कि क्योंकि गैस उनकी (अंबानी बंधुओं की) निजी संपत्ति नहीं है।

अतिरिक्त सालिसिटर जनरल मोहन परासरन ने मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा यह (गैस) आरआईएल या आरएनआरएल की निजी संपत्ति नहीं है। यह राष्ट्रीय संपत्ति है।

आरआईएल की दलील खत्म होने के बाद जैसे ही सरकार ने अपनी दलील शुरू की आरएनआरएल के वकील राम जेठमलानी ने इस विवाद में पेट्रोलियम मंत्रालय को एक पक्ष की तरह उसकी दलील सुने जाने पर आपत्ति जताई।

उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने बंबई हाई कोर्ट में पक्ष के तौर पर शामिल किए जाने के संबंध में अपना निवेदन वापस ले लिया था और इसे सिर्फ हस्तक्षेपकर्ता के तौर पर स्वीकार किया गया था।
   
आरएनआरएल के रुख का विरोध करते हुए परासरन ने कहा कि सरकार को पक्ष बनने का पूरा अधिकार है क्योंकि गैस राष्ट्रीय परिसंपत्ति है और प्राकृतिक संसाधन है। उन्होंने कहा आरआईएल (मुकेश अंबानी के समूह) और आरएनआरएल अपने बीच में यह फैसला नहीं कर सकते कि गैस का बंटवारा कैसे करना है जो राष्ट्रीय परिसंपत्ति और प्राकृतिक संसाधन है, सरकार के दायरे में है और जिसका इस्तेमाल देश के हित में होना है।

परासरन ने कहा यह आरआईएल और आरएनआरएल की निजी संपत्ति नहीं है और सरकार उनके बीच हुई कोई भी सहमति को मानने के लिए बाध्य नहीं है। इस मामले की सुनवाई कर रही पीठ में न्यायमूर्ति बी सुदर्शन रेड्डी और पी सदाशिव शामिल हैं।

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