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'खलिश': हकीकत संजोने की एक कोशिश

'खलिश': हकीकत संजोने की एक कोशिश

उर्दू और हिन्दी साहित्य की जानी-मानी हस्ती खलिश देहलवी के उर्दू शेरों का एक संकलन ’खलिश’ का विमोचन किया गया। मध्य प्रदेश के लोगों का एक रचनात्मक प्रयास माने जाने वाली मध्य प्रदेश फाउण्डेशन द्वारा ये विमोचन लेखक को सम्मानित करने के लिए इंडिया इंटरनेशनल सेंटर पर आयोजित एक समारोह के दौरान किया गया। केंद्रीय मंत्री डॉ. फारुक अब्दुल्ला इस समारोह के मुख्य अतिथि थे।

समारोह की शाम पर उर्दू कविता के जाने-माने नामों जैसे मुंबई के गीतकार नक्स लयालपुरी और राहत इंदौरी से भी कुछ सुनने का मौका मिला। शाम के दौरान उर्दू कविता के इन जीती जागती शख्सियतों ने अपनी कविताएं प्रस्तुत की। मध्य प्रदेश के पूर्व राज्यपाल बलराम जाखड़, सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश मार्कन्डेय काटजू, चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी और सांसद डॉ. महबूब बेग जैसे मेहमान भी समारोह में मौजूद थे।

'खलिश' उर्दू शेरों का एक ऐसा संकलन है जिसमें लिखे हर शब्द का अपना अलग माधुर्य है। ये किताब नि:संदेह रचनाकार की आत्मा है और इस उर्दू लेखक की सोच और कल्पना का एक जीता जागता प्रतिरुप भी। इस किताब में उर्दू शेर की एक श्रृंखला है (जो कि देवनागरी लिपि में भी लिखी गई है। और उसके साथ ही हर शेर का अंग्रेजी अनुवाद भी है ताकि यूरोप और अमरीका के वो पाठक जो उर्दू या देवनागरी नहीं समझते वो भी लेखक की सोच और भावनाएं समझ सकें और उनका आनंद उठा सकें। ये अंग्रेजी अनुवाद खलिश देहलवी के करीबी सहयोगी जहीर अहमद द्वारा किया गया है।

अपनी किताब के बारे में बात करते हुए, खलिश देहलवी ने कहा, ’’कविता शब्दों को मंत्रमुग्ध करने वाली ऐसी लड़ी में पिरो सकते हैं जो ना सिर्फ तर्क दे सकती है बल्कि उम्मीद के फरिश्ते का रूप भी बन जाती है। मैंने अपने शेरों में हकीकत को संजोने की कोशिश की है साथ ही एक आम इंसान की काल्पनिक दुनिया को भी दिखाया है और ये सबकुछ बेहद आम भाषा में। मैं जाकिर अहमद का बहुत शुक्रगुजार हूं जिन्होंने मेरी कल्पना को अंग्रेजी अनुवाद में बदलने का अनोखा प्रयास किया। इसके अलावा मैं मध्य प्रदेश फाउण्डेशन को भी आभार व्यक्त करना चाहूंगा, जिन्होंने मेरे काम को सम्मान देने और इस अनुभव को मेरे लिए साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मुझे उम्मीद है कि मेरी ये रचनाएं पढ़ने वालों के दिल को छुएंगी।’’

अभिव्यक्ति का सौंदर्य, सोच की मधुरता और बारीकी यही वो चीजें हैं जो इस किताब को प्रामाणिकता दिलाती हैं। इस किताब में खलिश देहलवी की कविता के गहन नमूने संकलित हैं और साथ ही उनका अंग्रेजी अनुवाद भी है। संकलन की कविताएं ये ध्यान में रखकर चुनी गई हैं कि उनकी सामग्री और शैली बेहतर होने के साथ ही आम पाठकों को आसानी से समझ में आ सकें। मौलिक कविता की आत्मा और शैली बरकरार रखने के लिए लेखक ने ऐसे शेर चुने हैं जो साधारण, स्पष्ट और तुकबंद हैं।

खलिश देहलवी पिछले 50 सालों से लिख रहे हैं और अब तक हिन्दी और उर्दू साहित्य में एक सम्मानजनक स्थान बना चुके हैं। इनकी प्रकाशित किताबों में शामिल हैं- हसरतें, ये कुर्बतें ये दूरियां, कुछ बातें उनकी, चांदनी का धुँआ, मौज-ए-सबा, हफ्र-ए-नवान।

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