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मेरा बेटा मास्टर ब्लास्टर जैसा हो

मेरा बेटा मास्टर ब्लास्टर जैसा हो

मैं सचिन के समर्पण को सलाम करता हूं। 20 साल एक ही खेल को खेलते रहना किसी भी खिलाड़ी के उस खेल के प्रति लगाव और जुनून को दिखाता है। यह दिखाता है कि उन्होंने इसके लिए कितनी कुर्बानियां दी हैं। अपने घर से दूर रहना। बच्चों को समय न दे पाना, ऐसी ही कुर्बानियां हैं जो खिलाड़ी को महान बनाती हैं।

एक सप्ताह पहले ही मुझे पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है। मैं चाहता हूं कि मेरा बेटा भी सचिन जैसा हो। उसमें सचिन जैसी सादगी, समर्पण और संयम कूट-कूट कर भरा हो। कुछ दिन पहले मैंने उन्हें 175 रन की पारी खेलते हुए देखा था। मुझे बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगा कि वह वही सचिन है जिसने 20 साल पहले अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी। दो दशक तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के बाद भी उनमें वही जुनून दिखाई दिया।

अगर कोई खिलाड़ी इतने लम्बे समय तक खेलता है तो चोटों से भी उसका सामना होना स्वाभाविक है। सचिन की तरह ही मेरा भी चोटों से कई बार सामना हुआ। चोट के बाद वापसी करना वाकई बहुत मुश्किल होता है।

इसके लिए खिलाड़ी को बहुत मेहनत करनी पड़ी और फिर भगवान का आशीर्वाद भी साथ होना जरूरी होता है। ऐसे समय में सबसे ज्यादा जरूरी होता है टीम का सपोर्ट। मुझे लोग हॉकी का सचिन कहते हैं। उनके साथ नाम जुड़ने भर से जो एहसास होता है उसे मैं बयां नहीं कर सकता है। हां, सचिन जैसा महान बनने की कूवत मुझमें नहीं है। सचिन तो देश का गौरव हैं। मन में बस यही बात बार-बार आती है कि अभी देश के लिए और खेलना है।

सचिन के रिकॉर्ड उनकी सफलता की कहानियां खुद ब खुद कहते हैं। इसके लिए उन्हें किसी को प्रूव करने की जरूरत नहीं है। उन जैसा महान खिलाड़ी सदियों में सामने आता है। मैं तो उनके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20 साल पूरे होने पर यही संदेश देना चाहता हूं कि उनकी और उनके परिवार की हर ख्वाहिश पूरी हो। सचिन देश के लिए 2011 का विश्व कप जीतें।
(लेखक हॉकी स्टार हैं)

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