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महंगाई के खिलाफ फतवा क्यों नहीं?

आश्चर्य की बात यह है कि महंगाई की समस्या का भी राजनीतिकरण कर दिया गया है। हमारे देश के कर्णधार वंदेमातरम् पर फतवे जारी करने, बोफोर्स कांड, तेलगी कांड, चाराघोटाले, मंदिर-मस्जिद विवाद, सत्ता बरकरार रखने की चिंता, वोट बैंक की राजनीति, भ्रष्टाचार को प्रोत्साहन, अपराधियों एवं पूंजीपतियों को संरक्षण, नक्सलवादी-उग्रवादी-आतंकवाद की समस्यां तथा विदेशी खेलों के आयोजनों के साथ पाकिस्तान, चीन व अमेरिका की मुखालफत व प्रशंसा के चक्कर में, राष्ट्र की विपुल धन राशि को बर्बाद करने में लगे हुए हैं। किसके पास फुर्सत है कि महंगाई पर ध्यान दें। और इसके खिलाफ फतवा दें।
किशन लाल कर्दम, उत्तम नगर, नई दिल्ली

कानून जेब में
पैरोल पर सिर्फ पैसे वालों का हक है या सभी का? अगर सभी का हक है तो क्यों आम आदमी को पैरोल पर रिहा नहीं किया जाता, सिर्फ इसलिए कि उसकी जेब में हरे-हरे नोट नहीं होते। सबकी आंखों के सामने जेसिका लाल का हत्यारा मनु शर्मा एक महीने कीपैरोल पर रिहा हो जाता है, कारण ताकवर परिवार से ताल्लुकात और आर्थिक रूप से सम्पन्न होना। जब दोनों ही ताकत आपके पास हैं तो समझ जाइए आपको लाइसेंस मिल गया, कानून की धज्जियां उड़ाने को। देखने वाली बात यह है कि आखिर ऐसे खतरनाक मुजरिम को आम लोगों के बीच घूमने व आपराधिक गतिविधियों की छूट देने वालों के खिलाफ क्या कानूनी कार्यवाही होती है।
सोनल पंवार, सीसीएस यूनिवर्सिटी, मेरठ
किराया बढ़ाना गलत

दिल्ली सरकार द्वारा अभी हाल ही में डीटीसी के किरायों में की गई वृद्धि से आम आदमी की कमर ही टूट गई है। बड़ी ही चालाकी से तीन रु. के टिकट को 10 रु. का बना दिया। इस अलोकतांत्रिक कदम की ईमानदारी से भर्त्सना तो करनी ही चाहिए, तभी जनता के सच्चे सेवक बन सकेंगे। जनहित को देखते हुए किराया वृद्धि पर पुनर्विचार आवश्यक है, जिससे निम्नवर्ग को लाभ मिल सके। अगर ऐसा नहीं हुआ तो जनता नेताओं को माफ नहीं करेगी।
सत्यपाल शर्मा, शालीमार बाग
क्या 2013 तक भला होगा?

चुनाव के पहले दिल्ली सरकार ने जनता को गुमराह करने के लिए 1400 कॉलोनियों को आनन-फानन में प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी किए थे तथा वायदा किया था कि जल्द ही इन अनधिकृत कॉलोनियों को मूल प्रमाण-पत्र दिए जाएंगे, जिससे कि इन कॉलोनियों को मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जा सकें। मगर लगता है कि 2013 के कुछ महीने पहले ही प्रोविजनल सर्टिफिकेट की जगह मूल सर्टिफिकेट मिल पाएंगे। क्योंकि दिल्ली विधानसभा के चुनाव नवम्बर 2013 में होंगे।
नरेन्द्र कुमार, बी-2/6, कोण्डली, दिल्ली
महंगाई
महंगाई के कारण
जनता रो रही है
सरकार सो रही है
दिनों दिन
विश्वास खो रही है।
आकाश सोलंकी, बी-3/36, यमुना विहार, दिल्ली

 

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