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आरएसपीएम

आपने प्रदूषण के संदर्भ में आई रिपोर्टो में कई बार आरएसपीएम का सुना होगा। आरएसपीएम (रीस्पाइरेबल सस्पेंडेड पर्टकिलेट मैटर) के कण हवा में घुलनशील होते हैं और इनका साइज दस माइक्रोन से भी कम (मानव के बाल की चौड़ाई के पांचवें भाग से भी कम) होता है। आरएसपीएम कार्बनिक और अकार्बनिक तत्वों का मिश्रण होते हैं।
हालांकि यह कण बंद और खुले वातावरण दोनों में मिलते हैं पर ज्यादातर इनके मिलने की संभावना खुले के बजाए बंद वातावरण में ज्यादा होती है। प्लास्टिक का सामान, सिंथेटिक फाइबर, दरी, पर्दो, मॉनिटर और घरेलू सामानों में इनके होने की संभावना ज्यादा होती है। साथ ही यह कण वातावरण से रासायनिक क्रिया और गाड़ियों के धुएं के दहन से उत्पन्न होते हैं। आकार में जितना छोटा कण होगा, उतनी ही जल्दी वह नाक में प्रवेश करेगा। 
क्यों खतरनाक हैं आरएसपीएम: नाक आरएसपीएम को ब्लॉक नहीं कर पाती है, खासतौर से तब जब उनके कणों का आकार 2.5 माइक्रोन (मानव के बाल की चौड़ाई के बारहवें हिस्से से भी कम) होता है। सामान्यत: नाक 4 से 5 माइक्रोन के आरएसपीएम कणों को नाक में प्रवेश करने से रोकने में सक्षम होती है। धूल के कणों के साथ मिश्रित हो जाने पर यह कण और ज्यादा भारी हो जाते हैं, जिससे नाक में यह आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। 
शरीर को कौन से नुकसान: आरएसपीएम शरीर के लिए नुकसानदायक हैं। इसकी वजह से फेफड़ों के फंक्शन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। तो वहीं इसकी वजह से अस्थाई रूप से बुद्धि का हास होता है। इसके अलावा इसकी वजह से ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, डिप्रेशन, बैचेनी होना जैसे रोगों की शिकायत हो जाती है।

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