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स्टॉक ब्रोकर

शेयर बाजार में निवेश के दौरान कई बार स्टॉक ब्रोकर महज फायदे के लिए आपको गलत सलाह देता है। इसलिए जरूरी है कि आप कुछ पड़ताल कर लें ताकि बाद की परेशानी न हो।
ल्ल स्टॉक ब्रोकर का कमीशन मुख्यत: शेयरों की खरीद-बेच के आधार पर निर्भर करता है। सामान्यत: वह आपको सलाह देता है कि अपनी आय को तेजी से बढ़ाएं। इसका मतलब ये हुआ कि आप शेयरों को जल्दी-जल्दी बेचें।
ल्ल एक ब्रोकर आपके मौजूदा पोर्टफोलियो पर ध्यान नहीं देता और आपको उस स्टॉक को लेने की सलाह देता है जिसको वह बेहतर समझता है। वहीं स्टॉक खरीदना या सारा पैसा एक ही कंपनी में लगा देने से आपके पोर्टफोलियो में जोखिम बढ़ जाता है।
ल्ल सामान्यत: ब्रोकर सभी क्लाइंट को एक ही तरह की सलाह देता है। प्रत्येक व्यक्ति की जोखिम लेने की क्षमता एक समान नहीं होती। उदाहरण के तौर पर एक तेजी से बढ़ती छोटी कंपनी में निवेश करना, युवा निवेशकों के लिहाज से ठीक है, पर उम्रदराज निवेशकों के लिए ये एक बड़ा जोखिम हो सकता है।
ल्ल स्टॉक को उसके करेक्ट प्राइस पर ही खरीदना चाहिए। एक ब्रोकर की सलाह मुख्यत: शॉर्ट टर्म ट्रेंड पर आधारित होती है जो किसी भी समय बदल सकती है।

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