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अगला नवाब कौन?

आचार संहिता की अवहेलना लोकसभा चुनावों की घोषणा के साथ ही चुनाव आयोग की ओर से जारी आचार संहिता लागू मानी जाती है। सरकारों और नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे इसका पालन करंगे और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए कोई भी शिलान्यास, उद्घाटन नहीं होगा और न ही सार्वजनिक स्थानों पर बैनर-पोस्टर लगाए जाएंगे। हालांकि, इस आचार संहिता का पालन होता नहीं दिख रहा है। तमाम मामले ऐसे आ रहे हैं जहां चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों को खुलेआम झुठलाया जा रहा है। ऐसे में मतदाताओं को ही समझदारी से काम लेना होगा। उन्हें समझना होगा कि जो नेता विजयी होने से पहले अनुशासन में नहीं हैं, वे जीतने के बाद क्या करंगे? सतीश भारद्वाज, जीरकपुर पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरे चंडीगढ़ में वाहनों की भीड़ कम करने के लिए प्रशासक ने टैक्स बढ़ाने का सुझाव तो दे दिया है, लेकिन उन्हें शायद अपने शहर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट की वस्तुस्थिति का पता नहीं। लोगों को एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए या तो घंटों इंतजार करना पड़ता है या फिर काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। निजी वाहन के बिना यहां सफर करना वास्तव में परशानी का घर और पैसों की बर्बादी है। निजी वाहनों पर लगाम कसने की सोच से प्रशासन को उबरना होगा। साथ ही बढ़ती आबादी और वर्तमान की जरूरतों के हिसाब से नये रूट तय करके उन पर बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए। जयदेव वशिष्ठ, चंडीगढ़

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