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वृद्ध माँ-बाप को बेसहारा छोड़ा तो खैर नहीं

जिनके हाथों का सहारा लेकर चलना सीखा था, उन्हीं माँ-बाप को बुढ़ापे में बेसहारा छोड़ देने वाले लाडलों की अब खैर नहीं। माता-पिता को छोड़ने वाले या उनको परेशान करने वाले बेटों के खिलाफ न केवल मुकदमा दर्ज किया जाएगा बल्कि उनको जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। आईजी सूर्य कुमार शुक्ल ने निर्देश दिया है कि ऐसी किसी शिकायत पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाए। इस बात का ध्यान रखा जाए कि किसी बुजुर्ग को उसके घरवाले त्यागने की नीयत से किसी स्थान पर न छोड़ने पाएँ।

दरअसल पिछले कुछ समय से पुलिस के पास ऐसे कई मामले आए हैं जिसमें माँ-बाप ने अपने बेटे-बेटियों के खिलाफ शिकायत की है। अधिकारी मानते हैं कि संयुक्त परिवारों के टूटने के कारण ही ऐसी समस्याएँ सामने आ रही हैं। पुलिस की तरफ से दबाव पड़ने पर कुछ दिन के लिए हालात ठीक हो जाते हैं कि लेकिन समय बीतते ही बुजुर्ग पुन: परेशान किए जाते हैं। विशेषकर विधवा महिलाओं को भरण-पोषण के लिए काफी परेशानी होती है। इसे देखते हुए माता-पिता की देखभाल न करने वाले बेटे-बेटियों पर नकेल कसने की तैयारी की गई है।

आईजी ने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों, माता-पिता के भरण-पोषण, बेहतर चिकित्सीय सुविधा के लिए ‘माता-पिता व वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण और कल्याण अधिनियम-2007’ बनाया गया है। इसके तहत पीड़ित वरिष्ठ नागरिकों की सुनवाई न्यायाधिकरण द्वारा की जाएगी। न्यायाधिकरण के आदेशों की अवहेलना करने पर तीन माह का कारावास या पाँच हजार रुपये जुर्माना या दोनों हो सकता है। इस बाबत सभी जनपद प्रभारियों को निर्देश दिया गया है कि ऐसा कोई मामला सामने आने पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए।

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