DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

वन्देमातरम से ऐतराज सियासी जिद : मुनव्वर

कभी खुशी से, खुशी की तरफ नहीं देखा, तुम्हारे बाद किसी की तरफ नहीं देखा। यह सोचकर कि तुम्हारा इंतजार करना है, ता-उम्र घड़ी की तरफ नहीं देखा। शायर मुनव्वर राना की शेर-ओ-शायरी से बृहस्पति कॉलेज प्रांगण ऐसे गुलजार हुआ कि आम-ए-खास वाह-वाह कह उठा। उन्होंने कहा कि जब हम गंगा-यमुना के पानी से वजू कर सकते हैं तो फिर वन्देमात्रम से ऐतराज सिर्फ और सिर्फ सियासी जिद है।

सोमवार को बृहस्पति महाविद्यालय में कॉलेज की संस्थापिका डॉ. माधवी लता के परिनिर्वाण दिवस पर मुनव्वर राना का एकल काव्य का आयोजन किया गया। मुनव्वर राना ने सुनाया, कहीं किसी से भी जिक्र ए जुदाई का मत करना, इन आँसुओं से आशनाई मत करना, जहाँ जी न करे वहीं बिछुड़ जाना, मगर खुदा के लिए बेवफाई मत करना। लिपट जाता हूँ माँ से, मौसी मुस्कुराती है, मैं उर्दू में गजल कहता हूँ हिन्दी मुस्कराती है। अभी जिन्दा है माँ मेरी मुङो कुछ भी नहीं होगा। मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है।

उन्होंने शादी के बाद बेटियों की जुदाई के दर्द को कुछ इस तरह बयाँ किया, ऐसा लगता है कि जैसे खत्म मेला हो गया, उड़ गई आँगन से चिड़िया, घर अकेला हो गया। इससे पहले कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि कमिश्नर  वेंकटेश्वर लू ने सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्जवलित करके की। कमिश्नर ने मुनव्वर राना को डॉ माधवी लता शुक्ला स्मृति सम्मान से नवाजा।

कमिश्नर ने समाज में घटते लिंगानुपात, बढ़ती जातीयता, क्षेत्रवाद पर संस्कृत के दोहों से प्रहार किया।मजहब का सही अर्थ बताते हुए कहा कि सब मिलकर सबका भला करे स्वयं के लिए मत सोचो। छात्रओं से समाज को बदलने को तैयार रहने और उच्च आदर्शो को अपनाने की बात कही। कार्यक्रम में डा. ऊषा रत्नाकर शुक्ला, प्राचार्या डॉ रचना शुक्ला, उपप्राचार्या डॉ सौमिनी सिंह, डॉ प्रभा दीक्षित आदि लोग मौजूद रहे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:वन्देमातरम से ऐतराज सियासी जिद : मुनव्वर