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डीएम-सीएम तक को देख लेता है पंचायत सचिव

पंचायत सचिव की इतनी ताकत कि उसे डीएम और सीएम का भी खौफ नहीं रहा। ऐसे दुस्साहसी की जानकारी से सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी चकित रह गए। मामला उनके गृह जिले का है, जहां पंचायत सचिव पलटपुर की उपमुखिया को मानदेय नहीं दे रहा। पैसे मांगने पर कहता है, जहां जाना है जाओ डीएम से शिकायत करो या सीएम से, पैसे नहीं मिलेंगे। लगभग एक माह के बाद लगे जनता दरबार में भीड़ तो कम थी लेकिन, जो भी शिकायतें मिली उसमें राशन प्रणाली, पंचायती राज, कर्ज लेने और ग्रामीण विकास के ही मुद्दे अधिक थे।

पंचायत सचिव की धमकी से डरी उपमुखिया कमला देवी घर से बाहर भी नहीं निकल रही। आखिरकार उसके पति शिवकुमार तांती ने मुख्यमंत्री से मदद मांगी। तब सीएम ने पंचायती राज सचिव को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। कटिहार के कारू मंडल ने आरोप लगाया कि राशन दुकान का लाइसेंस देने के लिए स्थानीय मार्केटिंग अफसर 50 हजार रुपए रिश्वत मांग रहा है। मुख्यमंत्री ने एडीजी (विजिलेंस) अनिल सिन्हा को घूसखोर को पकड़ने का निर्देश दिया। बुनकर कल्याण संघ के प्रतिनिधियों ने कर्ज माफी प्रक्रिया को आसान बनाने की मांग की। उनका कहना था कि राज्य सरकार ने वर्ष 2006 में बुनकरों का पांच लाख रुपए तक का कर्ज माफ करने देने की घोषणा की। लेकिन एनपीए (नॉन प्राफिटेबुल एकाउंट) की शर्त होने की वजह से मात्र दस प्रतिशत बुनकरों को ही कर्ज माफी का लाभ मिल सका। मुख्यमंत्री ने उद्योग विभाग के अफसरों को बैंकों के साथ बात करके मामले का हल निकालने का निर्देश दिया।

अभिषेक कुमार और कुमार सुंदरम ने ग्रामीण विकास विभाग में प्रोग्राम अफसरों की शीघ्र बहाली की मांग की। उनका कहना था कि 500 अफसरों की बहाली के लिए मार्च में ही काउंसलिंग हुई। ग्रामीण विकास सचिव विजय प्रकाश ने एक माह के भीतर बहाली का आश्वासन दिया। विभिन्न विभागों में कॉन्ट्रैक्ट पर बहाल जुनियर इंजीनियरों ने नौकरी स्थाई करने की मांग की। उनका कॉन्ट्रैक्ट जनवरी में समाप्त हो जाएगा। बिहार ग्राम रक्षा दल के महामंत्री विन्द कुमार ने दलपतियों को पंचायत सचिव बनाने और मानदेय में बढ़ोतरी की मांग की। दलपतियों को सिर्फ 175 रुपये मासिक भत्ता मिलता है।

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