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महावतों के बिना घुमा रहे राजाजी पार्क

देश में हाथियों की शरण स्थलियों में से एक राजाजी पार्क को पर्यटकों के लिए तो खोल दिया गया, लेकिन महावतों के बिना। पार्क में एक भी नियमित महावत नहीं है। यहां हाथियों के लिए चारा लाने वाले और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों से महावतों का काम लिया जा रहा है। वन विभाग पर्यटकों को हाथियों पर बैठकर राजाजी पार्क की सैर करा रहा है लेकिन यह तथ्य पर्यटकों की चिंता बढ़ा देगा कि हाथी के साथ जो व्यक्ति चल रहा है वह महावत नहीं बल्कि चतुर्थ श्रेणी का अन्य कर्मचारी है।

राजाजी पार्क में इस समय चार हाथियों को पर्यटकों के घुमाने के काम में लाया जा रहा है। पिछले सीजन तक विभाग के पास एक नियमित महावत था। लेकिन अब वह सेवानिवृत्त हो चुका है। हाल यह है कि हाथियों को प्रशिक्षित करने और इनसे काम लेने का जिम्मा चारा लाने वाले और अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के हवाले है।

बड़ा खतरा यह है कि महावत से इतर कर्मी के लिए हाथी को संभालना आसान नहीं है। ऐसी स्थिति में पर्यटकों को दिक्कत हो सकती है। राजाजी पार्क में समूह से अलग हुए नर हाथियों और गुलदारों की काफी संख्या है। इनके हमलावर होने पर प्रशिक्षित महावत ही जान बचा सकता है।

विभाग के पास महावतों के रिक्त पद हैं, लेकिन योग्य आवेदक नहीं मिल पा रहे हैं। जिन लोगों ने परिवार से, चिड़ियाघरों, सर्कसों में काम करके हाथियों को संभालना सीखा है, उनको कोई तरजीह नहीं मिलती। प्रदेश के अपर प्रमुख वन संरक्षक डॉ. श्रीकांत चंदोला का कहना है कि विभाग के कर्मियों को महावत के तौर पर प्रशिक्षण दिलाने की भी योजना तैयार की जा रही है।

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