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बदरी के लिए माणा की कन्याओं ने बुना कंबल

जिस घृत कंबल पर भगवान बदरी विशाल आगामी छह माह तक साधनारत रहेंगे वह बनकर तैयार हो गया है। माणा की 14 वर्षीय कुंवारी कन्याओं ने इसे बुना है और इसी घृत कंबल को लपेटकर भगवान आगामी छह माह तक देवताओं द्वारा पूजे जाएंगे। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को बदरीनाथ के कपाट बंद होंगे। और आगामी छह माह तक भगवान बिना श्रृंगार के रहते हैं और विश्व के कल्याण के लिए साधनारत हो जाते हैं। इन छह माह में भगवान एक घृत कंबल ओढ़े रहते हैं जिसे घी से लपेटा जाता है।

बदरीनाथ के निकट के माणा जिसे मणिभद्रपुर भी कहा जाता है वहीं की कुंवारी कन्या भगवान के लिए ऊनी कंबल बुनती हैं। इधर, कपाट बंद होने से पहले लक्ष्मी मंदिर में भी भगवती लक्ष्मी की विदाई का समय आ गया है। अब भगवती लक्ष्मी छह माह तक भगवान विष्णु के समीप रहेंगी। इसलिए लक्ष्मी मंदिर से छह माह तक लक्ष्मी को विष्णु मंदिर तक ले जाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। 17 नवंबर को जब कपाट बंद होंगे तो रावल स्त्री वेष धारण करेंगे।   वेदपाठी भुवन उनियाल कहते हैं कि रावल स्त्री स्वरूप इसलिए रखते हैं कि वे लक्ष्मी की सखी के रूप में आते हैं जिस प्रकार से

सखियां मायके से विदा होने पर लड़की को विदा करती है ठीक उसी तरह लक्ष्मी मंदिर से उनकी सहेली बनकर उन्हें विदा करते हैं। बदरीनाथ से व्यापारियों ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया है। व्यापार संघ के अध्यक्ष श्रीराम कहते हैं कि आने वाले छह माह सभी के लिए कष्टदायक होते हैं।

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