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कैसे होगा कल्याण का कल्याण

पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह द्वारा भाजपा में वापसी के संकेत दिए जाने को लेकर पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व बेचैन हो गया है। चूँकि कल्याण सिंह लोकसभा चुनाव के पूर्व भाजपा छोड़ने के समय वर्तमान केंद्रीय नेतृत्व को खासी खरी खोटी सुना चुके हैं, ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व उन्हें पार्टी में दोबारा स्वीकार करने के लिए आसानी से तैयार नहीं होगा। सूत्रों ने बताया कि इसके लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की हरी झण्डी और उसके केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव से कल्याण की भाजपा में वापसी संभव हो पाएगी।

सपा से नाता तोड़ने के बाद कल्याण के सामने केवल भाजपा में ही वापसी का रास्ता निकल सकता है या फिर वे अपनी पुरानी राष्ट्रीय क्रांति पार्टी को पुनर्जीवित कर सकते हैं, इस ओर नजरें लगी हैं। सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों कल्याण सिंह की संघ के मुखिया मोहन भागवत से मुलाकात भी हुई थी। संघ भी भाजपा की वर्तमान पतली हालत से चिंतित है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह का कार्यकाल अगले महीने खत्म होने वाला है। श्री सिंह का कल्याण से छत्तीस का आँकड़ा जगजाहिर है।

राजनाथ अध्यक्ष पद से तो हट जाएँगे लेकिन यूपी भाजपा में उनका एकाधिकार इस समय कायम है। कल्याण की वापसी हुई तो एकाधिकार में खलल पड़ना तय है। पार्टी के प्रदेश स्तरीय सभी नए और पुराने नेताओं की नजर अब केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हुई है। एक पूर्व पदाधिकारी ने कहा कि यदि कल्याण सिंह भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव देते हैं, तो पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को उसे नकारना आसान नहीं होगा।

संघ इस मामले में अवश्य दखल देगा। कल्याण को अगर भाजपा में शामिल किया जाता है, तो वे अपने पुत्र राजवीर को समायोजित करने की माँग भी रखेंगे यह तय है। हालांकि फिलहाल कल्याण ने जो संकेत दिया है, उसमें कोई शर्त नजर नहीं आ रही है।

उधर संघ से जुड़े रहे एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि पार्टी के जो नेता कल्याण का विरोध कर उन पर दगाबाजी का आरोप लगा रहे हैं, उन्हें बताना चाहिए कि खुद ऐसे नेताओं का पार्टी में कितना जनाधार है और उनकी कार्यप्रणाली से पार्टी को फायदा पहुँचा है या नुकसान?

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