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परमाणु अप्रसार पर भारत का आश्वासन चाहता है अमेरिका

परमाणु अप्रसार पर भारत का आश्वासन चाहता है अमेरिका

खर्च किए जा चुके ईंधन के पुर्नप्रसंस्करण को लेकर शीर्ष भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों की बातचीत के बीच ओबामा प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत परमाणु अप्रसार पर आश्वासन दे, जो कि परमाणु व्यापार के रास्ते को साफ करने में एक बिंदु है।

आश्वासन की आवश्यकता को परमाणु व्यापार में निकटवर्ती बाधा के तौर पर देखा जा रहा है। इसने भारतीय पक्ष को चकित कर दिया है, जो पिछले साल हुए असैन्य परमाणु करार के लिए 123 समझोते के लागू होने को लेकर आशान्वित है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आगामी वाशिंगटन दौरे में बातचीत में यह मुद्दा सामने आ सकता है। ओबामा प्रशासन के तहत राजकीय अतिथि के तौर पर अमेरिका आने वाले मनमोहन पहले वैश्विक नेता होंगे। ओबामा प्रशासन ने पिछली फरवरी में आश्वासन की जरूरत का जिक्र किया था और विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन तथा ऊर्जा मंत्री स्टीवन चू ने अपने भारत दौरों में इस बात के लिए दबाव बनाया था।

सूत्रों ने कहा कि भारत की तरफ से इस तरह का आश्वासन पत्र नहीं मिलने की स्थिति में अमेरिकी ऊर्जा विभाग भारत के साथ किसी भी तरह का असैन्य परमाणु व्यापार करने के लिए अमेरिकी कंपनियों को अनिवार्य लाइसेंस पार्ट एट टेन, जारी नहीं कर सकेगा।

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