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गले से पेट तक प्लास्टिक फंसा, लेकिन बचा

गले में प्लास्टिक का लोथ फंसने से एक मरीज की जान आफत में आ गई, उसका बचना नामुनकिन था अगर समय पर उसे ट्रीटमेंट नहीं मिलता। उसे जब अस्पताल लाया गया तो कई डाक्टरों ने यह कह इंकार कर दिया कि बचने के चांस 99 प्रतिशत नहीं है, लेकिन फिर भी आस लगा इलाज किया गाया और एक सफल ऑपरेशनल ट्रीटमेंट किया गया, जिससे मरीज की जान बची।

इलाज के बाद भी नोएडा के 22 वर्षीय एक युवक को जब सांस लेने व खाना अटकने में परेशानी शुरू हुई तो गले में प्लास्टिक के लोथ की मौजूदगी पकड़ी गई। जांच में पाया गया कि युवक की आहार नाल से लेकर पेट तक तकरीबन 25 सेंटीमीटर लंबा लोथ पड़ा हुआ था। दिल्ली ही नहीं समीपवर्ती शहरों का यह पहला ऐसा नॉन ऑपरेशनल ट्रीटमेंट है, जिसमें समय पर अगर लोथ न निकाला जाता तो मरीज की जान बचाना आसान नहीं होता। यह आपरेशन हाल में ही नोएडा के कैलश अस्पताल में किया गया।

नोएडा की एक फर्म में कार्यरत 22 वर्षीय अजीत सिंह के मुंह में लौक्टाइट की पूरी बोतल उस समय खाली हो गई थी, जब वह मुंह से बोतल के ढक्कन को खोल रहा था। कंपनी वाले अजीत को सेक्टर-27 स्थित कैलाश अस्पताल लेकर आए जहां ईएनटी सजर्न ने गले के आसपास के लौक्टाइट के टुकड़ों को निकाल दिया। अजीत को कुछ दिनों के बाद गले में समस्या शुरु हुई। कैलाश अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी डॉ.संदीप गुलाटी व उनकी टीम ने अजीत की एंडोस्कोपी जांच की, तो पाया कि गले से लेकर पेट के मुंहाने तक प्लास्टिक का 25 सेंटीमीटर और डेढ़ सेंटीमीटर चौड़ा प्लास्टिक का लोथ पड़ा हुआ है। डॉ.गुलाटी ने कहा कि मैंने अपने पूरे करियर में जटिल से जटिल ट्रीटमेंट किए हैं, लेकिन ऐसा मामला पहली बार मेरे सामने आया। एंडोस्कोपी की मदद से फॉरनेस बॉडी रिमूवल उपकरणों की मदद प्लास्टिक के इस लंबे लोथ को निकाला गया।

डॉ.गुलाटी ने कहा कि लौक्टाइट विशेष प्रकार के रसायन से युक्त तरल प्लास्टिक होता है, जिसका इस्तेमाल बड़ी से बड़ी प्लास्टिक को मोड़ने और जोड़ने में किया जाता है। लोथ इस प्रकार से चिपका हुआ था कि 7-7 सेंटीमीटर के तीन हिस्सों में इसे निकाला जा सका। मरीज की आहारनाल में कई खरोंचे थी। नॉन ऑपरेशनल ट्रीटमेंट की यह प्रक्रिया इतनी जटिल थी कि इसमें एक घंटे से भी ज्यादा समय लग गया।

कैलाश अस्पताल के डॉ.संदीप गुलाटी (सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी) ने बताया कि समय पर अगर प्लास्टिक के लोथ को न निकाला जाता तो मरीज की जान बचाने के लिए मेजर और महंगी सजर्री के अलावा और कोई विकल्प नहीं होता। लौक्टाइट विशेष प्रकार के रसायन से युक्त तरल प्लास्टिक होता है, जिसका इस्तेमाल बड़ी से बड़ी प्लास्टिक को मोड़ने और जोड़ने में किया जाता है। लौक्टाइट हवा के संपर्क में आकर जम जाता है। ट्रीटमेंट सफल रहा और मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है।

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