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उर्दू मीडिया: हिंदी के लिए बेमिसाल एकजुटता

‘तीसरे दर्जे के सियासतदां अपनी पार्टी को चर्चा में बनाए रखने के लिए उलजलूल हरकतें करते रहते हैं। महाराष्ट्र एसेंबली में सपा विधायक अबू आसिम आजमी के हिंदी में शपथ  लेने पर महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के सदस्यों का हमला, उसी घटिया सियासत की ताजा मिसाल है। हिंदी राष्ट्र भाषा है। इसे बोलने से रोकना कानूनन जुर्म है।’ ये पंक्तियां हैं ‘ऐतमाद’ के संपादकीय ‘गुंडागर्दी और शर्नाक हरकत’ की। इस घटना से मनसे सुप्रीमो राज ठाकरे और सपा नेता अबू आजमी को कितना सियासी नफा-नुकसान हुआ, यह तो आने वाला वक्त बताएगा।

यह जरूर खुलकार सामने आया कि हिंदी के प्रति उर्दू प्रेस की नजरों में बेपनाह कद्र और अहमियत है। ऐसी एकजुटता शायद ही उर्दू अखबारों ने कभी उर्दू जुबान की बदहाली पर दिखाई है। इस वाकये को सप्ताह होने को है, फिर भी उर्दू मीडिया का गुस्सा ठंडा होता नहीं दिख रहा। अखबार हिंदी भाषा पर हमला करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की वकालत कर रहे हैं। देश के तीन शहरों से प्रकाशित एक उर्दू अखबार ने इसी बहाने एक पुराने भ्रम को तोड़ने की कोशिश की है। उर्दू अखबारों में खोजी रपटें न के बराबर छपती हैं। इस अखबार ने मराठी भाषा के नाम पर उत्पात मचाने वाले मनसे के आठ विधायकों के बारे में एक चौंकाने वाली रिपोर्ट छापकर इस मुगालते को तोड़ा है।
 
रिपोर्ट के मुताबिक, राज ठाकरे ही नहीं रामकदम, जेवरों के शौकीन रमेश वंजाले वगैरह के बच्चों किसी मराठी में नहीं, आला कॉन्वेंट स्कूल में तालीम ले रहे हैं। राज के बेटे ने स्कॉटिश स्कूल से एसएससी की है। ऑप्शनल में मराठी की जगह जर्मनी थी। बेटी उर्वशी भी कान्वेंट की छात्र है। रमेश वंजाले का बटा स्प्रिंगडेल में पढ़ता है।
 एक अखबार में साजिद रशीद ने शिव सेना से लोहा लेने वाले अखबारनवीस निखिल वागले के मराठी मुद्दे पर राज ठाकरे को लेकर नर्मी दिखाने पर उनकी भी जबर्दस्त खिंचाई की है। ‘महाराष्ट्र एसेंबली में हंगामा’, ‘तमाचे की गूंज’, ‘राज ठाकरे चाचा के सामने बौने’, ‘मनसे का खात्मा जरूरी’, ‘गुंडागर्दी और शर्मनाक हरकत’, ‘सजा तब्दील न हो’ आदि लेख, संपादकीय में सभी उर्दू अखबार एक राय हैं। उनका कहना है। वक्त आ गया है मुल्क की एकजुटता दरकाने वाली महाराष्ट्र नव निर्माण सेना और उसके मुखिया को सबक सिखाने का। इससे पहले कि वे बड़ा बखेड़ा खड़ा करें उन्हें काबू करना ही बेहतर होगा। अब ये डॉन जैसी हरकतें करने लगे हैं। अब तक उनकी पार्टी के लोग बिहार, यूपी के नाम पर मजदूरों, रिक्शा, ऑटो चालकों, दुकानदारों को पीटते रहे। अब एसेंबली भी उनकी गुंडागर्दी का निशाना बनने लगी है। मनसे के निलंबित चारों मेंबरों के सदन में खेद प्रकट करने को उर्दू मीडिया काफी नहीं मानता। ‘इंकलाब’ को डर है। कहीं नव निर्वाचित विधानसभा अध्यक्ष उनके माफी मांगने पर सजा कम या हल्का न कर दें।

‘औरंगाबाद टाइम्स’ शिव सेना के अबू आजमी को सड़क पर चलना-फिरना बंद कर देने की धमकी के हवाले से कहता है कि मनसे के विधायकों को हिंदी के बदले अंग्रेजी में शपथ लेने वालों पर अपना गुस्सा उतारना चाहिए था। ‘रोजनामा राष्ट्रीय सहारा’ में शकील शम्स ने ‘कब तक बर्दाश्त करेंगे हम गुंडागर्दी’ में राज ठाकरे को मनोरोगी करार दिया है। लेखक कहते हैं। उनका बचपन और जवानी नफरत की सियासत के बीच परवान चढ़ा है। इसलिए वे न सिर्फ उसी रास्ते पर चल पड़े हैं। इस मामले में अपने चचा को भी पछाड़ देना चाहते हैं। ‘सहाफत’ अफसोस जाहिर करते हुए कहता है। उम्मीद थी राज अपने चाचा से होशियार निकलेंगे। मौके की मसलेहत समझकर उनकी गलतियां नहीं दोहराना चाहेंगे। लेकिन ये बाला साहब ठाकरे से भी गए गुजरे निकले। इस अखबार ने मनसे को बढ़ावा देने के लिए महाराष्ट्र के कुछ कांग्रेसियों की भी खिंचाई की है।

प्रदेश के कई कांग्रेसी अपने सियासी लाभ के लिए हमेशा ऐसे लोगों का इस्तेमाल करते रहे हैं। पहले बाल ठाकरे का इस्तेमला किया गया। अब राज ठाकरे पर उनकी नजर है। वसंत दादा पाटिल ने भी इंदिरा गांधी को कमजोर करने के वास्ते अफवाह फैला दी थी। वह मुंबई को महराष्ट्र से अलग करना चाहती हैं। अब भ्रम फैलाया जा रहा है। पूरबिया नहीं भगाए गए तो देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर उनका कब्जा हो जाएगा। ‘हमारा समाज’ में राजद सुप्रमी लालू प्रसाद कहते हैं। जो समझते हैं कि बगैर यूपी, बिहारी मेहनतकश के सहयोग से कोई प्रदेश तरक्की कर लेगा। यह उसकी भूल है।

लेखक ‘हिन्दुस्तान’ से जुड़े हैं
malik_hashmi64@yahoo.com

 

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