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अकेले ढाई सौ चुनावी सभा करेंगे

लोकसभा चुनाव में प्रचार की कमान नहीं संभाल पाने का झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन को मलाल है। गुरूजी के बीमार रहने का पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था। प्रचार में टिके रहने और आदिवासियों के बीच विश्वास बनाए रखने के लिए झामुमो के कार्यकर्ता सीने में गुरूजी की तसवीर लगाए निकलते थे।

लेकिन विधानसभा चुनाव में शिबू सूद समेत इसकी भरपाई करना चाहते हैं। पांच चरणों में सोरेन की करीब ढाई सौ चुनावी सभा होगी। सभी 81 विधानसभा क्षेत्र में वह जाएंगे। कार्यकर्ता के लिए वही स्टार प्रचारक हैं। शिबू के मैदान में आने से संथाल परगना का परिदृश्य भी बदल रहा है। दुमका, बोकारो, रांची सोरेन का स्टेशन है। यहीं से वह सभी जगह जा रहे हैं। दुलाल भुइंया, चंपई सोरेन, सुखराम, मथुरा महतो, सालखन सोरेन, भूषण तिकी, अमूल्यो सरदार, नलिन सोरेन, सुधीर महतो सरीखे उम्मीदवार भी शिबू के जल्दी आने पर जोर दे रहे हैं।
एक विधानसभा क्षेत्र में वह तीन-चार सभा करेंगे। कुछ सीटों पर धुंआधार प्रचार करने की तैयारी है। सात सीटर उड़नखटोला मंगाया गया है।
संथाल परगना की 18 सीटों पर सोरेन की विशेष नजर है। कांग्रेस, भाजपा की घेराबंदी तोड़ने के लिए हफ्ते भर से दुमका में कैंप कर रहे हैं। 23 नवंबर तक कार्यक्रम टाइट है। गोड्डा, महगामा, नाला, लिट्टीपाड़ा, मधुपुर जामा, पाकुड़ में दो दजर्न से ज्यादा सभा कर चुके हैं। भाजपा, कांग्रेस के रणनीतिकार भी भीतरी तौर पर महसूस करते हैं कि आदिवासी इलाकों में शिबू का घूमना समीकरणों को प्रभावित करेगा। संगठन सचिव सुप्रियो भट्टाचार्य, झायुमो के केंद्रीय अध्यक्ष विनोद पांडे का कहना है कि अकेले गुरूजी ने विरोधियों की नींद हराम कर दी है।

कार्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी संभाले मदन नायक कहते हैं कि संथालपरगना-कोल्हान में गुरूजी का ही जलवा चलेगा। अगले तीन दिन (16-18 नवंबर) के बीच सोरेन टुंडी, सिंदरी, निरसा, बोरियो, बरहेट तथा पोड़ेयाहाट विधानसभा क्षेत्र में एक दजर्न चुनावी सभा करेंगे। झामुमो की नजर कांग्रेस तथा भाजपा के स्टार प्रचारकों पर भी है।

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