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जब व्रत रखें

भारत में व्रतों का खासा महत्व है। जहां तक महिलाओं की बात है तो हर हफ्ते उनका कोई न कोई व्रत जरूर होता है। कई महिलाएं व्रत जल्दी वजन कम करने के लिए करती हैं। जब आप व्रत रखते हैं तो ब्लड शुगर तेजी से कम होती है जिसके परिणामस्वरूप ऊर्जा में कमी आती है और शरीर दिमाग को संकेत भेजता है कि उसे भोजन की जरूरत है। जब उसे खाना नहीं मिलता तो वह मांसपेशियों और लीवर के ग्लाइकोजन का इस्तेमाल करने लगता है। ग्लाइकोजन, ग्लूकोज का एक फॉर्म होता है। यह दिमाग का ईंधन होता है। जब शरीर में ग्लाइकोजन की कमी हो जाती है तो यह शरीर के अमीनो एसिड का प्रयोग करने लगता है। ग्लूकोनियोजेनेसिस प्रक्रिया द्वारा अमीनो एसिड टूटकर ग्लूकोज में बदल जाता है। इसके बाद ऊर्जा का स्नोत फैट होता है। लाइपोलाइसिस प्रक्रिया द्वारा शरीर के फैट का प्रयोग एनर्जी प्रोडक्शन के लिए होता है। व्रत के पहले दिन तो आपके शरीर को भोजन की जरूरत महसूस होती है, लेकिन धीरे-धीरे शरीर इसका आदी हो जाता है।
पाचन तंत्र के काम करने का एक तरीका होता है। इसमें थोड़ी सी बाधा होने से एसिडिटी होने की संभावना रहती है। लंबे समय तक व्रत रहने से शरीर तनाव में आ जाता है और इससे बचने के लिए स्ट्रेस हार्मोन का स्नव करने लगता है। व्रत के दौरान एसिडिटी, शरीर में दर्द, मतली आने जैसी समस्याएं होती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि व्रत में फल खाने से शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और ऑक्सीडेंट मिल जाते हैं। वहीं ये भूख को भी शांत करते हैं। दूध पीने से शरीर को पर्याप्त काबरेहाइड्रेट्स, फैट्स और प्रोटीन प्राप्त होता है। डॉक्टर कहते हैं कि लेमन जूस और नारियल का पानी लेने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बिगड़ने नहीं पाता जिससे डिहाइड्रेशन और कॉलरा नहीं होते।

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