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इंश्योरेंस एजेंट

सामान्यत: इंश्योरेंस खरीदते समय लोग इंश्योरेंस एजेंट पर आंख मूंद कर भरोसा करते हैं जिसकी वजह से कई बार या तो अपने मुताबिक इंश्योरेंस नहीं ले पाते या फिर इंश्योरेंस लेने में गड़बड़ियां हो जाती हैं। ऐसे में जरूरी है कि जब भी आप इंश्योरेंस एजेंट से बात करें तो कुछ बातों के बारे में पड़ताल जरूर करें।
ल्ल इंश्योरेंस उत्पाद का शुल्क, अमान्य और अन्य अन्य फीचर किसी इंश्योरेंस में लिखा होता है। आपसे उम्मीद की जाती है कि आप खरीदने से पहले इसे गौर से पढ़ें क्योंकि सेल्समैन अकसर महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपा लेते हैं। ऐसे में इंश्योरेंस के कागजातों को ध्यान से पढ़ें और एजेंट से तब तक प्रश्न पूछें जब तक कि आप संतुष्ट न हो जाएं।
ल्ल टर्म प्लान सस्ते लाइफ इंश्योरेंस उत्पाद होते हैं। इनकी कीमत कम होती है और कवरेज ज्यादा देते हैं। टर्म प्लान खासकर पूरी तरह से टर्म प्लान को बेचना मुश्किल होता है क्योंकि ये समय-सीमा खत्म होने के बाद रिटर्न नहीं देते।
ल्ल अगर आप यूलिप से दस साल से पहले बाहर निकलते हैं तो यह आपके लिए महंगा पड़ सकता है।
ल्ल कई यूलिप में फ्रंट एंड कॉस्ट नहीं लगता। इसे प्रीमियम एलोकेशन चार्ज भी कहा जाता है। इन सभी प्लान्स में प्रावधान है कि यह आपके फंड से शुल्क काटें बजाए उसके प्रीमियम के।
ल्ल जो यूलिप प्रिंसिपल या रिटर्न अमाउंट की सुरक्षा की गारंटी देते हैं, इसके लिए ग्राहक को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है।
ल्ल फंड के प्रदर्शन पर लगातार निगाह रखें। किसी फंड का चुनाव इस आधार पर न करें कि फंड ए 40 से 85% इक्विटी में निवेश करता है और फंड बी 75 से 100 %।

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