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मतदाताओं की खामोशी बनी प्रत्याशियों की परेशानी

प्रत्याशियों के लिए मतदाताओं की खामोशी परेशानी का सबब बन गई है। प्रत्याशी मतदाताओं की नब्ज टटोलने में लगे हैं, पर मतदाता फिलहाल उम्मीदवारों को सुनने का काम कर रही है। सदर विधानसभा में इस बार झाविमो और कांग्रेस के गठबंधन होने से कांग्रेस प्रत्याशी सौरभ नारायण सिंह को एक तरफ राहत जरूर मिली। लेकिन राजद प्रत्याशी गुलाम मोइनुद्दीन के अखाड़े में उतरने से दूसरी ओर उनकी परेशानी बढ़ गई है।

पिछले विधानसभा चुनाव 05 में कांग्रेस प्रत्याशी सौरभ को 39750 वोट, निर्दलीय से खड़े ब्रजकिशोर जायसवाल को 36305 मत और भाजपा के देवदयाल कुशवाहा को 26860 वोट मिले थे। तीनों प्रत्याशियों के जीत-हार का अंतराल काफी कम रहा था। यह चर्चा आम थी कि अगर ब्रजकिशोर जायसवाल चुनाव में नहीं उतरते तो इसका लाभ भाजपा के देवदयाल को मिलता। इस बार ब्रजकिशोर अखाड़े में नहीं है। लेकिन चुनावी महासमर में झामुमो के उम्मीदवार संजय गुप्ता भी जाना माना चेहरा है। आजसू ने अभी पर्चा नहीं खोला है। लेकिन इसमें भी शहर का एक युवा चेहरा चर्चा में है कि आखिरी वक्त में वह तुरूप का इक्का होगा। इधर, विभिन्न राजनीतिक दल के प्रत्याशियों को दूर-दराज के इलाकों का दौरा करने से मूलभूत समस्याओं की कमी से दो-चार होना पड़ रहा है। हर कोई अपने-अपने नजरिये से निवर्तमान विधायकों के कार्यकाल का आकलन कर रहा है।

अधिकांश मतदाता इसके बाद भी किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने के मूड में नहीं हैं। जो इस बार सेवा करने का लुभावना नारा मतदाताओं को दे रहे हैं, उसे भी जनता संकोच भरी निगाहों से ही देख रही है। सदर विधानसभा क्षेत्र में कटकमसांडी और सदर का कुछ इलाका नक्सल प्रभावित है। इन क्षेत्रों में मूलभूत समस्याएं मुंह बाए खड़ी है। बहरहाल अभी तो मतदाताओं की चुप्पी टूटने का इंतजार प्रत्याशी कर रहे हैं। इसका नतीजा किस ओर जाएगा, उम्मीदवारों को भी इसकी बेसब्री से प्रतीक्षा है।

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