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डीएम करेंगे डिग्री कॉलेजों की जांच

प्रदेश के राजकीय और अनुदानित डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों को अब क्लास छोड़ना महंगा पड़ सकता है। इन पर अंकुश लगाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने डिग्री कॉलेजों की जांच का जिम्मा डीएम को दे दिया है। डीएम या उनकी ओर से नामित कोई मजिस्ट्रेट डिग्री कॉलेजों की जांच करेगा। जांच में गड़बड़ी मिलने पर इसकी रिपोर्ट उच्च शिक्षा विभाग को भेजी जाएगी तथा विभागीय स्तर पर संबंधित शिक्षक या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई होगी।

प्राइमरी स्कूलों की जांच के लिए हर जिले में बीएसए और माध्यमिक विद्यालयों के निरीक्षण के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक हैं। डिग्री कॉलेजों की जांच के लिए जिला स्तर पर कोई अधिकारी नहीं है। शासन का मानना है कि जिला स्तर पर जांच के लिए कोई अधिकारी न होने से डिग्री कॉलेजों के शिक्षक और कर्मचारी निरंकुश हो रहे हैं। इसका असर डिग्री कॉलेजों के शैक्षिक वातावरण पर पड़ता है।

पठन-पाठन बाधित होता है। प्रदेश के कई जिलों से ऐसी शिकायत भी आ रही थी कि डिग्री कॉलेज में पढ़ाई नहीं होती। शिक्षक आते ही नहीं हैं। इसे देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने यह व्यवस्था की है। विभाग की ओर से प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों और डीएम को भेजे गए पत्र में इस निर्देश का कड़ाई से पालन करने या करवाने को कहा गया है।

डीएम की व्यस्तता अधिक होती है इसलिए इस कार्य के लिए किसी मजिस्ट्रेट को नामित करने के लिए भी कहा गया है। प्रदेश में 400 से अधिक सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेज हैं, जहाँ के शिक्षकों तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के वेतन और भत्ते का भुगतान उच्च शिक्षा विभाग के अनुदान से किया जाता है। इसके अलावा राजकीय महाविद्यालय भी हैं।

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