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परचून दुकान से मंत्री तक का सफर

आय से अधिक संपत्ति हासिल करने के मामले में जेल में बंद पूर्व मंत्री एनोस एक्का की हसरत खूब पैसा कमाने, पब्लिक का काम करने और सीएम बनने की थी। इस दिशा में वह आगे भी बढ़े, लेकिन समय पलटा, मंत्रिमंडल से बरखास्त हुए, जेल चले गए।  फिलहाल वह चुनावी भंवर में फंसे हैं। कोलेबिरा के साथ सिमडेगा से भी लड़ेंगे।

एक्का लोगों से एक ही बात कहते हैं कि सिमडेगा का विकास चाहिए, तो मुझे चुनो। एनोस मंत्री कैसे बने और एनडीए-यूपीए का कैसे इस्तेमाल किया, यह जगजाहिर हो चुका है। लेकिन विधायक बनने के लिए एक्का ने जितनी मेहनत की उसके किस्से भी दिलचस्प हैं। विधायक बनने के बाद तो एक्का किस्से के केंद्र में ही रहे। 90 के दशक में वह पश्चिम बंगाल में रहते थे। 2000 के बाद वह अपने गांव ठेठईटांगर (सिमडेगा) लौटे। कोलेबिरा-सिमेडगा में एक्का के काम और नाम की पड़ताल करने पर कई तथ्य उभरे हैं।

गांव में ही परचून की दुकान खोली। साप्ताहिक हाट-बाजार भी जाते थे। तीन भाइयों में सबसे छोटे एक्का उन दिनों काफी मेहनती थे। खेती- बारी भी देखते थे। इस बीच छोटे-मोटे ठेका का काम करने लगे। ठेके की दुनिया में आए, तो राजनीतिक गलियारों से भी नाता जोड़ा। देखते- देखते ठेकेदारी में एक्का खूब चमके और पैसे भी कमाए। सिमडेगा के विधायक रहे नियेल तिर्की के करीबी थे। नियेल, एक्का को खूब मानते थे। लेकिन अब दोनों का रिश्ता बेहद खटासपूर्ण हो चुका है। अब तो दोनों के दिल की चाहत है कि एक-दूसरे को चुनाव में शिकस्त दें। सत्ता तक पहुंचने में पुराने साथी तिलेश्वर साहु उनके मददगार साबित हुए। अब साहु भी उनसे दूर हो चुके हैं। 


सिमडेगा ठाकुरटोली में बड़ा-सा घर बनवाया। जानने वाले बताते हैं कि गृह प्रवेश में एक्का ने हजारों लोगों को न्योता दिया और खाना भी खिलाया। मंत्री बने तो घर को अंदर-बाहर सजाने में लाखों रुपए लगे। रांची में बन रहा घर का नक्शा खुद एक्का ने अपनी इच्छा से तैयार कराया है। बाजार की कीमत 10 करोड़ से ज्यादा की होगी। उनकी चाहत है कि उनकी गाड़ी सीधे बेड रूम तक पहुंच जाए। एक्का के चुनाव जीतने के बाद नियेल ने समझा कि वह जैसा चाहेंगे वैसा ही होगा। लेकिन एक्का ने कांग्रेस के बदले एनडीए को चुना। फिर मंत्री बनने के बाद एक्का ने सिमडेगा को बना ली कर्मस्थली। इस बीच वह नियेल का सम्मान करते रहे और अपना राजनीतिक प्रभाव भी बढ़ाते रहे। नियेल को यह बर्दाश्त नहीं होता। समय के साथ टकराव बढ़ता गया। एनोस की नजर सीएम की कुर्सी पर भी रही। उन्होंने कई दफा अपने करीबियों से कहा भी कि कोड़ा को बिठाकर भूल हो गई।

घर के लोगों को इतना अहसास नहीं था कि एनोस इतनी संपत्ति हासिल कर रहे हैं। पत्नी जानती थीं, लेकिन इतनी दूर तक नहीं। घर के इंटरीरियर डेकोरेशन से लेकर जमीन खरीदने में एक्का अपना दिमाग लगाते थे। जमीन खरीदने की होड़ में भी वह शामिल रहे। गांव के लोगों को जरूरत पड़ने पर हजार-दो हजार से ज्यादा की मदद वह नहीं करते, लेकिन इतना जरूर कहते कि सीएम बनेंगे, तो कोई दुख में नहीं रहेगा। गांव वाले बताते हैं कि एक्का ने हमेशा चाहत पर विजय पाई।

शौक-
एक्का के शौक राजा रजवाड़े की तरह हैं। जूते उतारने के लिए भी नौकर-चाकर लगे होते थे। गांव के लोग बताते हैं कि इसी कड़ी में उन्होंने बेटे के जन्मदिन पर 50 हजार लोगों को मीट-भात का भोज दिया। गांव के बूढ़े-बुजुर्ग भी एक्का की चतुराई का दाद देते हैं। महंगे कपड़े, नई गाड़ियां, एलसीडी, हीरे, जवाहरात, कीमती पत्थर धारण करना भी एक्का के शौक में शामिल हैं।

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