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शासन ने स्कूलों के टॉयलेट पर मांगी रिपोर्ट

शासन की ओर से जिले के प्राइमरी और जूनियर हाई स्कूलों में बनाए गए टायलेट की स्थिति और उनके निर्माण की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी गई है। जिले के तमाम स्कूलों की ओर से टायलेट की परेशानियों के बारे में पता चल रहा था। इनमें ज्यादातर शिकायतें स्कूलों में बने टायलेट की स्थिति को लेकर थीं। बच्चों और उनके अभिभावकों की शिकायत थी कि स्कूलों में बने हुए टायलेट इस्तेमाल करने की स्थिति में नहीं है। वे इतने गंदें हैं कि उन्हें इस्तेमाल करने का कोई मतलब ही नहीं बनता है।

शासन की ओर से मांगे गए रिपोर्ट में कई बातें पूछी गई हैं जैसे स्कूलों में टायलेट बना हुआ है या नहीं। बना है तो कब बना है। उसकी स्थिति कैसी है। स्कूल में कितने बच्चों हैं और कितने टायलेट हैं। उन टायलेट की सफाई की क्या स्थिति है। उसमें पानी की क्या व्यवस्था है आदि तमाम सवाल हैं।

शासन की ओर से मांगे गए इस रिपोर्ट के कारण कई स्कूलों में टायलेट की सफाई और उसे ठीक करवाने का काम भी शुरू हो गया है। इसका एक उदाहरण बेसिक शिक्षा विभाग के दफ्तर के साथ बने हुए प्राइमरी स्कूल के टापयलेट का ठीक होना है। यह कई महीनों से बुरी हालत में था मगर रिपोर्ट के नाम पर यह चुस्त-दुरुस्त हो रहा है।

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