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अफसर ‘छिपा’ क्यों रहे अवैध धर्मस्थलों को?

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद प्रदेश के मुख्य सचिव ने उन अवैध धर्मस्थलों की लिस्ट मांगी है, जो सरकारी जमीनों पर कब्जे कर बनाए गए हैं। जानकर हैरत होगी, प्रशासन द्वारा बार-बार कहे जाने के बाद भी जीडीए, नगर निगम, यूपीएसआईडीसी, सिंचाई विभाग और पीडब्लूडी अपनी रिपोर्ट ही नहीं देना चाह रहे। प्रशासन गुस्से में है और सम्बंधित विभागाध्यक्षों पर कार्रवाई की चेतावनी दे डाली है।

प्रदेश शासन ने अवैध धर्मस्थलों की निगरानी के लिए सभी मंडल और जिला स्तर पर नोडल इकाइयां गठित की हैं। ऐसा सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद किया गया है। मंडल इकाई का अध्यक्ष कमिश्नर को जिला इकाई का अध्यक्ष डीएम को बनाया गया है, जो अपने स्तर से लगातार ऐसे मामलों की मानीटरिंग करेंगे। मुख्य सचिव अतुल गुप्ता ने पिछले दिनों सभी जिलाधिकारियों को परिपत्र भेजकर सरकारी जमीनों पर बनाए गए अवैध धर्मस्थलों के बारे में रिपोर्ट तलब की थी। इसके बाद हरकत में आए जिला प्रशासन ने आनन-फानन में विभागों की बैठक बुलाई और तुरंत ही रिपोर्ट देने के निर्देश जारी किए थे।

जानकर हैरत होगी, मुख्य सचिव के निर्देशों को भी अफसरों ने हवा में उड़ा दिया। सब काम टाइम पर होता तो सभी विभाग शनिवार तक प्रशासन को अपनी-अपनी रिपोर्ट सौंप देते मगर ज्यादातर विभागों ने ऐसा नहीं किया। विभाग की जमीनों को लेकर हमेशा बेपरवाह दिखाई देने वाले जीडीए, नगर निगम, यूपीएसआईडीसी, सिंचाई विभाग, पीडब्लूडी ने वही कहानी फिर दोहराई।

प्रशासन को यह बताकर ही नहीं दिया कि उन्होंने ऐसे कितने अवैध धर्मस्थल चिह्लित किए हैं। जबकि गाजियाबाद जिले में ऐसे मामले किसी से छिपे नही हैं। जिले की नगर पालिकाएं और नगर पंचायतों के साथ फोरेस्ट विभाग की रिपोर्ट प्रशासन को मिल तो गई मगर इनमें अवैध धर्मस्थलों की संख्या जीरो बताई गई है। बाकी विभागों की हालत पर एडीएम प्रशासन सतीश कुमार ने कड़ी नाराजगी जताई है और कार्रवाई की चेतावनी देते हुए सम्बंधित विभागाध्यक्षों का जवाब तलब किया है।

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