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गडकरी के बीजेपी अध्यक्ष बनने की प्रबल संभावना

गडकरी के बीजेपी अध्यक्ष बनने की प्रबल संभावना

राजनाथ सिंह की जगह नितिन गडकरी के भाजपा का अगला अध्यक्ष बनने की संभावना प्रबल हो गई है। मुख्य विपक्षी पार्टी में इसे पीढ़ीगत बदलाव कहा जा रहा है।

पार्टी सूत्रों ने रविवार को बताया कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी को पुनर्जीवित करने के लिए शीर्ष पद के लिए 52 वर्षीय गडकरी के नाम पर विचार किया गया। एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि गडकरी का नाम तय है। उन्हें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी पार्टी के अन्य सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श के बाद चुना है।

गडकरी के पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का संकेत इस बात की खबरों से भी मिला कि वहां पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष पद के लिए दौड़ शुरू हो गई है। फिलहाल गडकरी पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हैं। उनके नेतृत्व में पार्टी, शिवसेना को हटाकर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बन गई है।

गडकरी के पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की खबरों को तब बल मिला जब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने साफ कर दिया कि दिल्ली के किसी भी नेता को यह जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी। उन्होंने खासतौर पर अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, एम वेंकैया नायडू और अनंत कुमार के पार्टी अध्यक्ष बनने की संभावनाओं को खारिज कर दिया था।

ऐसा कहा जा रहा है कि शीर्ष पद के लिए संभावित उम्मीदवारों के तौर पर भागवत ने गडकरी और गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पारिकर का नाम लिया था, लेकिन पार्टी का कहना है कि यह चयन आडवाणी ने किया है।

पारिकर ने आडवाणी को कथित तौर पर सड़ा हुआ अचार बताकर अपनी संभावनाओं को खत्म कर लिया था। पार्टी के अगले अध्यक्ष का चुनाव साल के अंत तक होने की उम्मीद है। चुनाव अधिकारी थवर चंद गहलोत राज्यों में सांगठनिक चुनाव के बाद कार्यक्रम जारी करेंगे।

गडकरी वर्षों से महाराष्ट्र विधानपरिषद के सदस्य हैं और शिवसेना-भाजपा गठबंधन की सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री के तौर पर उनके कार्यों को काफी सराहा गया था। उन्होंने मुंबई में कई फ्लाईओवरों, पुणे-मुंबई एक्सप्रेस वे का निर्माण कराया और नागपुर के सौंदर्यीकरण का काम कराया था।

गडकरी नागपुर के रहने वाले हैं। इसी शहर में आरएसएस का मुख्यालय है और वह विदर्भ के जाने-माने नेता हैं। गडकरी के संघ से करीबी संबंध हैं और संघ किसी ऐसे ईमानदार नेता को अध्यक्ष के तौर पर चाहता है जो अपनी क्षमता साबित कर चुका है और जो सबको साथ लेकर चल सकता हो।

लोकसभा चुनाव के पहले ही साफ कर दिया गया था कि राजनाथ सिंह को अगले कार्यकाल के लिए अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा। वह 31 दिसंबर 2005 को भाजपा के अध्यक्ष बने थे। उन्हें जिन्ना प्रकरण पर आडवाणी के पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद पार्टी का नया प्रमुख बनाया गया था।

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