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तेंदुलकर के मैराथन करियर ने 20 का मील पत्थर छुआ

तेंदुलकर के मैराथन करियर ने 20 का मील पत्थर छुआ

मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20 बरस पूरे कर लिए और इसके साथ ही वह खेल के इतिहास में यह उपलब्धि हासिल करने वाले भारत के पहले और दुनिया के 16वें क्रिकेटर बन गए।

पाकिस्तान के खिलाफ 15 नवंबर, 1989 को 16 बरस की उम्र में पदार्पण करने वाले तेंदुलकर सोमवार को अहमदाबाद में जब श्रीलंका के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज के पहले टेस्ट में उतरेंगे तो उनका कैरियर 20 साल और एक दिन का होगा।
   
अब तक 19 साल और 143 दिन के टेस्ट करियर में तेंदुलकर ने रिकॉर्ड 159 टेस्ट मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने 19 साल और 325 दिन के अपने वनडे करियर में रिकॉर्ड 436 वनडे मैच भी खेले और पाकिस्तान के जावेद मियांदाद के बाद उनका वनडे करियर सबसे लंबा है।

सबसे लंबे टेस्ट करियर वाले खिलाड़ियों की सूची में वही एकमात्र खिलाड़ी हैं जो अभी सक्रिय तौर पर क्रिकेट खेल रहे हैं और 36 बरस का यह खिलाड़ी अब भी लगातार मजबूत होता जा रहा है।

तेंदुलकर के नाम वनडे और टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन और शतक का रिकॉर्ड है लेकिन फिर भी रनों के लिए उनकी भूख समाप्त नहीं हुई है। इस दिग्गज बल्लेबाज ने अब तक 159 टेस्ट में 54.58 की बेजोड़ औसत के साथ 12773 रन जोड़े हैं जिसमें 42 शतक और 53 अर्धशतक शामिल हैं।

वनडे में भी कोई भी बल्लेबाज तेंदुलकर के करीब भी नहीं है। मुंबई का यह बल्लेबाज हाल ही में वनडे मैचों में 17000 रन पूरे करने वाले दुनिया का पहला बल्लेबाज बना था। तेंदुलकर ने 436 वनडे मैचों में 17,173 रन बनाए हैं। तेंदुलकर वनडे और टेस्ट मैचों में मिलाकर 30000 रन पूरे करने से भी सिर्फ 54 रन दूर हैं।

मुंबई के इस बल्लेबाज की प्रतिभा बचपन में ही नजर आने लगी थी, जब उन्होंने अपने साथी विनोद कांबली के साथ 1988 में लॉर्ड हैरिस शील्ड इंटर स्कूल मैच में 664 रन की नाबाद साझेदारी की।

दाएं हाथ के इस आक्रामक बल्लेबाज ने अपने बल्ले से जो रिकॉर्ड बनाए उसने कामचलाऊ गेंदबाज के रूप में उनकी काबिलियत को लगभग दबा दिया और जब ही उनका जिक्र होता है तो उनकी बल्लेबाजी की ही चर्चा होती है, जबकि उन्होंने टेस्ट मैचों में 44 और वनडे मैचों में 154 विकेट चटकाए हैं।
  

तेंदुलकर के करियर में अगर कोई नाकामी भरा अध्याय रहा तो वह उनकी कप्तानी रही और दो बार मौका मिलने के बावजूद उन्होंने अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान देने को प्राथमिकता दी और कप्तानी छोड़ने के बाद हमेशा उनकी बल्लेबाजी में सुधार हुआ।

क्रिकेट के मैदान पर सफलता के नए अध्याय लिखने और दुनियाभर में लोकप्रियता की नई उंचाइयां छूने के बावजूद तेंदुलकर की सादगी में कोई बदलाव नहीं आया। एक सच्चे चैंपियन की तरह उन्होंने कभी यश और ख्याति को अपने दिमाग पर हावी होने और बल्लेबाजी को प्रभावित करने नहीं दिया।
    
वह आज भी अपने बल्लेबाजी में सुधार करने के लिए नई चीजें सीखने पर जोर देते हैं और अपने बल्लेबाजी कौशल में इजाफे के लिए घंटों नेट पर बिताते हैं जो उनकी प्रतिबद्धता, समर्पण और खेल के प्रति जुनून को दिखाता है।

  

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