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पाक सेना के आतंकी शिविर पर सीआईए की सहमति

पाक सेना के आतंकी शिविर पर सीआईए की सहमति

पाकिस्तान की सेना अमेरिकी खुफिया एजेंसी (सीआईए) की सहमति से इस्लामिक आतंकवादियों के लिए प्रशिक्षण शिविर चला रही थी।

फ्रांस के प्रसिद्ध आतंकवाद विरोधी विशेषज्ञ और करीब 15 वर्षों तक मुख्य जांच न्यायाधीश रहे ज्यां लूईस ब्रुगइरे ने अपनी एक किताब में यह खुलासा किया है।

ब्रुगइरे ने अपनी जांच निष्कर्ष में पाया कि आस्ट्रेलिया में वर्ष 2003 में गिरफ्तार किए फ्रांसीसी आतंकवादियों को पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने प्रशिक्षण दिया था।

उन्होंने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा जो भारतीय कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए बनाया गया था वह अब अलकायदा के अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी नेटवर्क का हिस्सा हो गया है। एक संदिग्ध आतंकवादी व्हिली ब्रिगेटे ने ब्रुगइरे को बताया कि उसने पाकिस्तानी सेना लश्कर-ए-तैयबा को आंतकवादी प्रशिक्षण शिविर चला रही थी जहां पर उसने वर्ष 2001-02 में ढाई महीने तक प्रशिक्षण लिया था।

उसने बताया कि इस शिविर में दो ब्रिटिश तथा दो अमेरिकी नागिरक भी प्रशिक्षण ले रहे थे। ब्रिगेटे ने बताया कि करीब दो हजार आतंकवादियों के प्रशिक्षण का कार्य पाकिस्तानी सेना के कार्यरत जवान कर रहे थे। पाकिस्तानी सेना और लश्कर-ए-तैयबा के बीच संबंध नजदीकी से भी ज्यादा था।

ब्रिगेटे ने बताया कि प्रशिक्षण शिविर के लिए सभी सामान पाकिस्तानी सेना के हेलीकॉप्टर से लाया गया था। पाकिस्तानी सेना और सीआईए इस शिविर की लगातार निगरानी भी करती थी। ब्रिगेटे ने कहा कि अमेरिका पर 11 सितंबर को हुए आतंकवादी हमले के बाद अमेरिकी सरकार ने पाकिस्तान पर अलकायदा से जुडे़ लोगों को प्रशिक्षण नहीं देने के लिए दबाव डाला था।

ब्रुगइरे ने कहा कि इस बात की पूरी संभावना है कि अमेरिका ने इन प्रशिक्षण शिविरों में विदेशी लोगों के प्रशिक्षण पर आंख मूंद रखी थी। ज्ञातव्य है कि भारत लंबे समय से यह कहता आ रहा है कि पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी (आईएसआई) प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आतंकवादियों को आतंकी प्रशिक्षण के लिए शिविर चलाने में मदद कर रही है।

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  • Web Title:पाक सेना के आतंकी शिविर पर सीआईए की सहमति