DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सप्ताह के व्रत-त्योहार (15 से 21 नवम्बर)

15 नवम्बर (रविवार) को मास शिवरात्रि व्रत।
मास शिवरात्रि व्रत : जो व्रती इस दिन उपवास करके बिल्व पत्तियों से भगवान शिवजी की पूजा करता है और रात्रि भर जागरण करता है, भगवान शिव उसे नरक से बचाते हैं और आनन्द व मोक्ष प्रदान करते हैं।
16 नवम्बर (सोमवार) को स्नान-दान-श्रद्धादि की परम पुण्यदायिनी सोमवती अमावस्या (आज के दिन तैल स्पर्श का निषेध है)। अन्वाधान। सूर्य की वृश्चिक संक्रांति प्रात: 11 बजकर 12 मिनट से। संक्रांति का विशेष पुण्यकाल सूर्योदय से संक्रांति काल तक, तत्पश्चात् सामान्य पुण्यकाल संक्रांति काल से सूर्यास्त तक। संकल्पादि में प्रयोजनीय हेमन्त ऋतु प्रारम्भ। कमला जयंती। गौरी तप व्रत। महाव्रतारम्भ। कात्तिर्क पूजा व्रत।

17 नवम्बर (मंगलवार) को मार्गशीर्ष मास शुक्लपक्षारम्भ। रुद्रव्रत (पीड़िया)। आधी रात के बाद पीड़िया का नदी या तालाब में विसजर्न। सौर (वृश्चिक) मार्गशीर्ष मासारम्भ।  लाला लाजपतराय निर्वाण दिवस।
18 नवम्बर (बुधवार) को चन्द्रदर्शन। पितृ पूजन।
19 नवम्बर (बृहस्पतिवार) को हिजरी जिलहिज्ज मास शुरू।
20 नवम्बर (शुक्रवार) को वैनायिकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत। ब्रह्मवर्त (बिठूर) में सिद्ध गणेश मंदिर में अभिषेक।
चतुर्थी व्रत : इस व्रत को व्रती वर्षर्पयत हर चतुर्थी को करके 4 वर्ष समाप्त होने पर सफेद कमल पर तांबे का कलश रखकर गणेशजी की मूर्ति का पूजन करें। सवत्सा गाय का दान करें, हवन करें और 24 सपत्नीक ब्राह्मणों को भोजन करवाकर वस्त्र आदि दान कर स्वयं भोजन करें तो इस व्रत से सब प्रकार के विघ्न दूर होते हैं और सब प्रकार की सम्पत्ति प्राप्त होती है।
21 नवम्बर (शनिवार) को द्वितीया नाग पंचमी व्रत। श्रीराम विवाहोत्सव। गुरु तेगबहादुर बलिदान दिवस।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सप्ताह के व्रत-त्योहार (15 से 21 नवम्बर)