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कानून के विद्यार्थी बेजुबानों की आवाज बनें: बालकृष्णन

कानून के विद्यार्थी बेजुबानों की आवाज बनें: बालकृष्णन

भारत के मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन ने कहा है कि विधि विद्यार्थी बेजुबानों की आवाज बनें और जनता के अधिकारों की रक्षा की जवाबदेही निभाएं।

मुख्य न्यायाधीश शनिवार को नेशनल लॉ इंस्टीटूट यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। मुख्य न्यायाधीश ने यूनिवर्सिटी के स्नातकोत्तर और स्नातक पाठ्यक्रमों की उपाधियां प्रदान की। उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों को मेडल भी प्रदान किए।

समारोह की अध्यक्षता मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एके पटनायक ने की। समारोह में यूनिवर्सिटी की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा और विधि मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी उपस्थित थे।

न्यायामूर्ति बालकृष्णन ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दीं। उन्होंने कहा कि प्रजातंत्र की जरूरतों के मुताबिक विधि शिक्षा के पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए। विधि के स्नातक समाज के कमजोर वंचित और उपेक्षित तबकों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि टेक्नालॉजी, इंटरनेशनल ट्रेड, इकोनॉमिक डेव्हलपमेंट, इन्टेलेक्चुअल राईट के क्षेत्र में हो रहे बदलाव को देखते हुए विधि शिक्षा के पाठ्यक्रमों में परिवर्तन की आवश्यकता है। उन्होंने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के शिक्षा स्तर की सराहना करते हुए कहा कि इस यूनिवर्सिटी ने देश में विधि शिक्षा के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाया है।

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