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सचिन का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

सचिन का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

मैच में हार-जीत चलती ही रहती है। लेकिन वे पिछले 20 साल से लगातार रिकार्ड तोड़ रहे हैं और दिल जीत भी रहे हैं। पिछले दो दशक सचिन तेंदुलकर का समय रहा है, क्रिकेट में भी और क्रिकेट के इतर बाकी दुनिया में भी। भारतीय टीम के लिए वे रन मशीन हैं, दर्शकों के लिए जीत की सबसे भरोसेमंद उम्मीद, और उससे भी बढ़कर एक पूरी पीढ़ी के लिए रोल मॉडल। 

आपकी बचपन की क्रिकेट की यादें क्या हैं?
अपने उम्र के बच्चों में मैं टॉप स्कोरर खिलाड़ी था। जब मैं दस साल का था तो मेरे दोस्तों ने मुङो चुनौती दी कि मैं 22-23 साल के लड़कों की क्रिकेट के सख्त गेंद की बॉलिंग को बिना पैड पहने खेलकर दिखाऊं। मैं तैयार हो गया और मैंने उन्हें अच्छी तरह खेला। घर वालों ने और खासकर मेरे पिताजी ने मुझे पूरी आजादी दी।


क्या आपका कोई आदर्श भी था?
मैं जॉन मैकेनरो, विवियन रिचर्ड और सुनील गवासकर का फैन था।


आपने क्रिकेट को ही क्यों चुना?
पता नहीं। मुझे लगता है कि क्रिकेट ही ऐसा खेल था, जिसे हम मिलकर खेल सकते थे। टेनिस के लिए आपको कोर्ट की जरूरत होती है। क्रिकेट के लिए आपको तीन स्टंप, एक बल्ला और एक गेंद चाहिए, फिर आप कहीं भी इसे खेल सकते हैं।


क्या तब लगता था कि एक दिन आप देश के लिए खेलेंगे?
जब इंटर स्कूल में मैंने पहली बार सैकड़ा बनाया, तब लगा कि मैं कुछ खास कर सकता हूं। तब सोचा कि इसे नियमित रूप से करना चाहिए। और इसी के बाद से चीजें बदल गईं। मुझे लगने लगा कि मैं यह कर सकता हूं। यह अति आत्मविश्वास नहीं था। बस मैं जानता था कि मैं एक दिन देश के लिए खेलूंगा। सवाल सिर्फ यह था कि कब, पर मैं जानता था कि यह होगा।


आपमें इतना आत्मविश्वास कहां से आया कि 16 साल की उम्र में ही वकार, वसीम और इमरान जैसी तिकड़ी का सामना किया?
शायद यह मेरा अपनी क्षमताओं पर विश्वास था। या यह इसलिए हो सका, क्योंकि चुनौतियां स्वीकारने में मुझे मजा आता है। जब मैं दूसरा टैस्ट खेल रहा था तो मैंने सोच लिया था कि मुझे कर के दिखाना है। टीम के साथियों ने बताया था कि पहले बीस मिनट तक टिक जाओ तो फिर सब कुछ आसान हो जाएगा। यही हुआ भी। मैं सामान्य हो गया और मुझे गेंद ज्यादा अच्छी तरह से दिखाई देने लगी। मेरा फुटवर्क , मेरी मन:स्थिति अच्छी हो गई। मैंने 59 रन बनाए और मुझे लगा कि मैं कर सकता हूं।


जीवन का सबसे बड़ा मोड़ कब आया?
जब 17 साल की उम्र में इंग्लैंड में मैंने पहला शतक लगाया, इस शतक की वजह से हम श्रृंखला में वापस आ सके। अगर आप इंग्लैंड या आस्ट्रेलिया में अच्छा कर दिखाते हैं तो दुनिया आपको गंभीरता से लेने लगती है। सिडनी में मैंने दोहरा शतक लगाया और इसके बाद पर्थ की काफी उछाल वाली पिच पर भी।


और आप मानते हैं कि पर्थ की आपकी ईनिंग सबसे अच्छी थी?
हां, सबसे अच्छी ईनिंग्स में से एक।


ईनिंग के हिसाब से या उम्र के हिसाब से?
उम्र नहीं, वहां आक्रमण का स्तर बहुत अच्छा था और मैदान काफी मुश्किल। इन हालात में भी मैं इसे कर सका।


जब आप जमते हैं तो क्या कोई लक्ष्य भी तय करते हैं?
हां मैं लक्ष्य तय करता हूं, लेकिन इसे अपने आप तक ही रखता हूं।


यह लक्ष्य क्या होता है?
यह सीरीज़ पर निर्भर करता है और बॉलिंग अटैक पर भी। मुझे क्या हासिल होगा और टीम का क्या सहयोग मिल पाता है, यह बहुत सी चीजों पर निर्भर करता है। लेकिन मैं हमेश अपना सबसे बेहतर देने के लिए तैयार रहता हूं।


आप हर तरह के मैदान पर इतना अच्छा कैसे खेल लेते हैं?
मुझे पता नहीं। मैं हमेशा मैदान पर अपने भाई अजीत से बात करता हूं। उसकी सलाह से मुझे फायदा मिलता है। मैं क्रिकेट पर हमेशा ही उससे बात करता हूं।


सबसे अच्छे खिलाड़ी होने के बावजूद आप लंबे समय तक कप्तान क्यों नहीं रह सके?
किसी भी समय मुझे कप्तान बनने का चाव नहीं था। मैं हमेशा खेलना ही चाहता था। कप्तानी किसी व्यक्ति के लिए नहीं होती, वह टीम के लिए होती है।


क्रिकेट इस बीच कई तरह से बदल गया है। खासकर बीस-20 के क्रिकेट को आप कैसे देखते हें?
लोगों को यह देखने में अच्छा लगता है और इसकी वजह से क्रिकेट ग्लोबलाइज्ड भी हो रहा है। अब ऐसे देश भी सामने आ रहे हैं, जो पहले क्रिकेट खेलते ही नहीं थे। पर मेरे लिए टेस्ट क्रिकेट ही नंबर वन है।

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