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छह सीटों पर वाम मोर्चा की पूरी तैयारी

बिहार में वाम मोर्चा छह लोकसभा सीटों पर कर गुजरने की तैयारी में जुट गया है। तीनों मजबूत वाम दल भाकपा माले, सीपीआई और सीपीएम प्रदेश के चुनावी इतिहास में पहली बार एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। इस एकता का असर छह चुनाव क्षेत्रों में दिखे और इस बार सूबे में खाता खोलने के लिए वाम दलों ने अपने सभी उम्मीदवारों की घोषणा कर चुनावी युद्ध का बिगुल भी बजा दिया है। पार्टी के रणनीतिकारों का स्पष्ट कहना है कि वाम दलों की एका का असर उनके द्वारा लड़े जा रहे सभी 33 सीटों पर दिखेगा पर छह सीटों पर तो पासा पलटने के भी आसार है।ड्ढr ड्ढr वाम दलों में बिहार में जमीनी तौर पर सबसे मजबूत माने जाने वाले माले ने सीवान, पाटलिपुत्र और आरा में अभी से जमीनी कसरत शुरू कर दी है। सीपीआई बेगूसराय और बांका में अपने को सीधी लड़ाई में लाने की जुगत में लगा हुआ है। वहीं कोसी की विभीषिका में हरदम जनता से जुड़े रहने का दावा कर सीपीएम सुपौल में अपनी जीत के प्रति आशान्वित है। वाम मोर्चा के पाटलिपुत्र के उम्मीदवार रामेश्वर प्रसाद सांसद रह चुके हैं। वर्तमान में इसी क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले पालीगंज से माले के नंद कुमार नंदा विधायक भी है।ड्ढr ड्ढr आरा क्षेत्र से से माले एक बार लोकसभा पहुंच चुका है। इसी क्षेत्र के सहार संदेश आदि क्षेत्रों में माले की जमीनी पकड़ है और खेतिहरों के खिलाफ वह लगातार लड़ता रहा है। सीवान में माले के प्रभाव को रोकने की रणनीति के तहत ही सैयद शहाबुद्दीन सांसद बनते रहे हैं। माले से शहाबुद्दीन की अदावत जग जाहिर है। सांसद शहाबुद्दीन के चुनाव नहीं लड़ने की खबर से माले वहां से अपने को सीधी लड़ाई में मानते हुए जीत सुनिश्चित करने में जुट गया है। बेगूसराय के सांसद रहे सीपीआई के उम्मीदवार शत्रुघ्न सिंह इस बार अपनी जीत दोहराने का दावा कर रहे हैं। वहीं बांका से जमीनी पकड़ वालेएमएलसी संजय कुमार को उम्मीदवार बनाकर सीपीआई ने वहां की लड़ाई दिलचस्प बना दिया है। सीपीएम के एमएलसी बलराम सिंह यादव कोसी के विभीषिका में जनता के बीच रहने को अपनी बड़ी उपलब्धि मानते हुए लोकसभा चुनाव में अपनी जीत पक्की करने में जुट गये हैं।

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