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मैं भारत के प्राचीन विचारों का वाहक हूं: दलाई लामा

मैं भारत के प्राचीन विचारों का वाहक हूं: दलाई लामा

तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने शनिवार को कहा कि भारत के अहिंसा और धार्मिक सहिष्णुता के संदेश का वह दुनियाभर में प्रसार कर रहे हैं।

बुद्धिजीवियों को संबोधित करते हुए दलाई लामा ने कहा कि मैं दुनियाभर में प्राचीन भारत के विचारों का वाहक हूं। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें इसलिए गहरी हैं क्योंकि यहां के लोग अंहिसा और धार्मिक सहिष्णुता में गहरी आस्था रखते हैं। यहां तक कि चार्वाक जैसे नास्तिक को प्राचीन भारत में संत का ऊंचा दर्जा दिया गया।

दलाई लामा ने कहा कि वह भारत को गुरु और तिब्ब्त को उसके शिष्य के रूप में देखते हैं। नागार्जुन जैसे महान विद्वान आठवीं सदी में बौद्ध धर्म का उपदेश देने तिब्ब्त गए थे। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों को हिंसा में अपनी जान गंवानी पड़ी और कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं बीसवीं सदी के युद्धों में तबाह हो गईं। दलाई लामा ने 21वीं सदी को सहिष्णुता और संवाद की सदी बनाने का आह्वान किया। दलाई लामा रविवार को नई दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे।

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