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सचिन के अनोखे किस्से

सचिन के अनोखे किस्से

.....तो टेनिस खिलाड़ी बन जाते सचिन
सचिन तेंदुलकर बचपन से अमेरिका के महान टेनिस खिलाड़ी जॉन मैकनरो के फैन रहे हैं। उनके साथ के कुछ लड़के स्वीडन के महान सितारे ब्योन बोर्ग के फैन थे। विंबलडन प्रतियोगिता के मैच टीवी पर देखते हुए बोर्ग के समर्थकों से खूब लड़ते थे मैकनरो के फैन सचिन। उन्हें बचपन के साथी मैक भी कहते थे। वह मैकनरो की तरह लंबे बाल रखने लगे थे, माथे पर बैंड पहनते थे। वो तो शुक्र है कि टेनिस खेलने के लिए कोर्ट की जरूरत पड़ती है, जो उनकी बिल्डिंग में उपलब्ध नहीं था। जबकि स्टंप लगाकर बैट उठाकर टेनिस बॉल से क्रिकेट वहां खेली जा सकती थी। बस इसी वजह से टेनिस के बजाए क्रिकेटर बन गए सचिन।

गरीब और विकलांग बच्चों की मदद में भी आगे
सचिन की सास अन्नाबेल मेहता मुंबई के एक एनजीओ ‘अपनालय’ से जुड़ी हैं। इसके जरिए सचिन हर साल 200 गरीब बच्चों को प्रायोजित करते हैं। इसके अलावा भी वह समय-समय पर गरीब, विकलांग और मंदबुद्धि बच्चों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। बड़े प्यार से उनसे बात करते हैं और वे जिस राज्य या शहर के हों, उन्हें मैच देखने का न्यौता भी देते हैं।
 
एक बार मुंबई में चंडीगढ़ से आए एक बच्चें ने बड़े प्यार से पूछा था कि हम आपका मैच कैसे देखें, हमारे पास टिकट खरीदने के लिए रुपए नहीं हैं। तब सचिन ने कहा था, ‘जब मोहाली में मैच होगा तो आप स्टेडियम में आना और बताना कि मैंने बुलाया है, मैं आपको टिकट दूंगा।’
 
स्कूल से ड्रेसिंग रूम तक होपिंगो/बैटिंगो
सचिन तेंदुलकर को यह खेल बहुत पसंद है। इसे होपिंगो/बैटिंगो कहा जाता है। इसमें यह तय है कि अगर आपका कोई साथी स्कीट पर उठते-बैठते होपिंगो/बैटिंगो नहीं कहता है तो आपके पास यह अधिकार होगा कि आप उसकी पिटाई कर सकें। सचिन के नजदीकी दोस्तों के अनुसार वह अपने खास साथियों के साथ भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में आज भी होपिंगो/बैटिंगो खेलते हैं।

तेंदुलकर टेबल टेनिस में भी कम नहीं
सचिन तेंदुलकर दाएं हाथ से बल्लेबाजी और गेंदबाजी करते हैं। वह टेबल टेनिस भी बहुत अच्छी खेलते हैं और वो भी दोनों हाथों से। अपने को रैकेट गेम का अच्छा खिलाड़ी मानने वाले लिएंडर पेस एक बार उनके साथ टेबल टेनिस खेल उनका जलवा देख चुके हैं। दोनों ने 30 गेम खेले और पेस केवल दस में ही जीत पाए। इसके बाद पेस की टिप्पणी थी कि, ‘सचिन किसी भी खेल में होते वह विश्व स्तरीय ही होते। क्रिकेट अन्य खेलों से लकी रहा है।’

कभी रनर नहीं लेते सचिन
सचिन तेंदुलकर अपने स्कूली क्रिकेट के दिनों से कभी रनर नहीं लेते। उनका कहना है कि, ‘जब मैं शॉट मारता हूं तो मैं ही यह जानता हूं कि गेंद कहां जा रही है और कितनी तेजी से जा रही है। यह ऐसी चीज है जिसे मेरा रनर कभी नहीं जान सकता।’

गावसकर के पैड और अंधविश्वास
सचिन तेंदुलकर को महान क्रिकेटर सुनील गावसकर ने एक जोड़ी पैड दिए थे। जब सचिन ने 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ पहला टेस्ट खेला तो वही पैड पहने थे। वह पैड पहनने के मामले में अंधविश्वासी हैं और हमेशा बाएं पैर पर पहले पैड बांधते हैं।

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