DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

..और गरजेगा लिटिल मास्टर का बल्ला

..और गरजेगा लिटिल मास्टर का बल्ला

जन्म- 24 अप्रैल, 1973
समय- दोपहर 2:35 बजे
स्थान- मुंबई (महाराष्ट्र)

15 अक्टूबर, 2009 से 15 अक्टूबर, 2012 तक राहु दशा में शुक्र की अंतर्दशा लगी है। यह सचिन को खेल में महत्वपूर्ण उपलब्धि, नए कीर्तिमान, बड़ा आर्थिक लाभ, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार की प्राप्ति कराएगी, किन्तु समय-समय पर स्वास्थ्य विशेषकर चोट, छोटी दुर्घटना, पेट एवं हड्डी की समस्या खेल की निरंतरता को प्रभावित करेगी।

हाल में हुए भारत-आस्ट्रेलिया सीरिज के दौरान सचिन तेंदुलकर ने सत्रह हजार रनों का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। तेंदुलकर एक दिवसीय क्रिकेट में 45 शतक के साथ 17 हजार रन और टेस्ट क्रिकेट में 42 शतक व 12 हजार रन से ज्यादा रन बनाने वाले इकलौते खिलाड़ी हैं। तेंदुलकर ने हैदराबाद में 141 गेंदों पर 19 चौके और 4 छक्के की मदद से 175 रनों की विशाल पारी खेलकर एकबार फिर से अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट का इकलौता बादशाह होने का प्रमाण दिया है। हांलाकि भारत-आस्ट्रेलिया से एक दिवसीय सीरिज हार चुका है। किन्तु तेंदुलकर ने अपनी बढ़ती उम्र को दरकिनार कर बल्ले से जलवा दिखाया।

पिछले हफ्ते क्रिकेट विश्वकप-2011 (19 फरवरी से 2 अप्रैल, 2011) के कार्यक्रम की घोषणा की जा चुकी है। सभी की निगाहें सचिन तेंदुलकर पर टिकी हैं। भारतीय टीम में सबसे सीनियर होने के नाते तेंदुलकर की भूमिका कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी से भी ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में आइए आज ज्योतिषशास्त्र के माध्यम से यह मालूम करें कि इतिहास पुरुष बन चुके तेंदुलकर का भविष्य कैसा है? अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट में वे कब तक बने रहेंगे? क्या तेंदुलकर का स्वास्थ्य बड़ी कामयाबी दिलाने में साथ निभाएगा? आइए इन सवालों के जबाव जानने के लिए एक नजर इनकी कुंडली पर डालते हैं।
 
एस्ट्रोलॉजिकल प्रोफाइल

सचिन तेंदुलकर का जन्म 24 अप्रैल, 1973 को सिंह लगन तथा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र की चतुर्थ चरण अर्थात धनु राशि में हुआ है। कुड़ली में लगनेश सूर्य एवं पराक्रमेश, कर्मेश, शुक्र की भाग्य में युति से उत्तम केन्द्र त्रिकोण राजयोग व ऊत्कृष्ट खिलाड़ी योग बना है। सुरवेश, भाग्येश मंगल तथा पंचमेश बृहस्पति की युति से उत्तम महाभाग्य एवं अखंड साम्राज्य योग बना है। छठे भाव में उच्च राशि का मंगल शत्रुहंता योग बना रहा है। केन्द्र-त्रिकोण व उत्कृष्ट खिलाड़ी योग ने तेंदुलकर को क्रिकेट की दुनिया का इकलौता ध्रुवतारा बनाया। अखंड-साम्राज्य योग ने सभी रिकॉर्ड तेंदुलकर के नाम किए जिसे तोड़ पाना किसी अन्य खिलाड़ी के लिए असंभव सा होगा।

शत्रुहंता योग ने उन्हें दुनिया के तमाम दिग्गज गेंदबाजों की धुनाई करने वाला और विरोधियों से भी अपनी तारीफ करवाने वाला बनाया। इसके विपरीत चन्द्र राहु युति से बने ग्रहण योग तथ सर्पश्रप दोष ने समय-समय पर स्वास्थ्य की समस्या, टेनिस एल्बो, खेल के दौरान चोट, विवाद, खेल में उतार-चढाव भी दिए और एक कप्तान के रूप में बड़ी सफलता नहीं लेने दी।
 
आने वाला कल
तेंदुलकर का भविष्य उज्ज्वल है। वर्तमान समय 15 अक्टूबर, 2009 से 15 अक्टूबर, 2012 तक राहु दशा में शुक्र की अंतर्दशा लगी है। यह सचिन को खेल में महत्वपूर्ण उपलब्धि, नए कीर्तिमान, बड़ा आर्थिक लाभ, राष्ट्रीय-अतराष्ट्रीय पुरस्कार की प्राप्ति कराएगी, किन्तु समय-समय पर स्वास्थ्य विशेषकर चोट, छोटी दुर्घटना, बुखार, पेट एवं हड्डी की समस्या खेल की निरंतरता को प्रभावित करेगी।
 
केंद्र-त्रिकोण एवं उत्कृष्ट खिलाड़ी योग में शामिल शुक्र भी अंतर्दशा (15 अक्टूबर, 2012 तक) में सचिन अभी और ऐसे नए कीर्तिमान व शतक बनाएंगे जिसे, तोड़ पाना दुनिया के किसी खिलाड़ी के लिए संभव नहीं होगा। इनके सितारों की माने तो ये श्रीलंका के विस्फोटक बल्लेबाज सनथ जयसूर्या की तरह अपनी उम्र के चालीस वर्ष तक अर्थात 24 अप्रैल, 2013 तक खेल सकते हैं।
 
किन्तु पहले की तरह सभी मैचों में एक जैसे प्रदर्शन की निरंतरता नहीं रहेगी। कुछ मैच के अतंराल पर एक विस्फोटक पारी व टीम इंडिया के संकटमोचक की भूमिका में नजर आते रहेंगे। बल्ले के साथ गेंदबाजी में भी कुछ नए रिकॉर्ड अपने नाम करेंगे। खेल मैदान से बाहर बड़ा आर्थिक करार, विज्ञापन एवं सामाजिक कार्यों के माध्यम से छाए रहेंगे। अगामी वर्षों में जून से अगस्त 2010/12 नवंबर, 2010 से 15 अप्रैल, 2011 तथा 18 सितंबर 2011 से 11 जनवरी, 2012 की अवधि तेंदुलकर के स्वास्थ्य एवं खेल जीवन की प्रभावित करने वाली होगी। अब तक पांच विश्वकप में खेल चुके सचिन अपना आखिरी विश्वकप 2011 (19 फरवरी से 2 अप्रैल, 2011) में खेलेंगे।

इस दौरान सचिन 12 नवंबर, 2010 से 25 अप्रैल, 2011 तक राहु दशा-शुक्र अंतर्दशा एवं राहु के प्रत्यान्तर में रहेंगे। ग्रहण व सर्पश्रप दोष में शामिल राहु पुन: सचिन के विश्वकप विजेता टीम का हिस्सा बनने के सपने पर ग्रहण लगा सकता है। इस संदर्भ में तेंदुलकर द्वारा जून, 2006 की तरह एक बार फिर से सर्पश्रप दोष की शांतिपूजा करा लेना अत्यंत शुभ साबित हो सकता है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:..और गरजेगा लिटिल मास्टर का बल्ला