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बड़ी मुश्किल से पैदा होता है सचिन

बड़ी मुश्किल से पैदा होता है सचिन

महज चंद पारियों के दम पर बनते-बिगड़ते करियर के इस दौर में पिछले बीस बरस से सफलता के नए शिखर छूने के बावजूद रनों की उसी भूख को बनाए रखने वाले जांबाज रनबांकुरे का नाम है- सचिन रमेश तेंदुलकर।  जिसकी कूवत, हौसले और पराक्रम के सिर्फ भारतीय ही नहीं बल्कि दुनिया भर के क्रिकेटप्रेमी रहे हैं।

आकड़ों की किताबों में नए कीर्तिमान अपने नाम करने वाले इस युगपुरूष में अभी भी वही मासूमियत और सादगी है जो करियर के शुरूआती दिनों में थी।
    
पाकिस्तान के खिलाफ 15 नवंबर, 1989 को घुंघराले बालों और बच्चों जैसी आवाज वाले इस नाटे कद के खिलाड़ी ने जब क्रिकेट में पदार्पण किया तो किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि आने वाले समय में इसका कद इस कदर बढ़ेगा कि हर कीर्तिमान उसके सामने बौना नजर आने लगेगा।
     
तेंदुलकर का विकेट गेंदबाज की प्रतिभा की कसौटी माना जाने लगा। उन्होंने वनडे क्रिकेट को 25-25 ओवरों की चार पारियों में बांटने का सुझाव रखा और सैद्धांतिक तौर पर आईसीसी ने रजामंदी भी जता दी।

इतने लंबे सफर के बावजूद थकान का नामो-निशान उनके चेहरे पर नहीं दिखता और ना ही वे संन्यास की बात करने को तैयार हैं।
 
स्कूली दिनों में 1988 में लॉर्ड हैरिस शील्ड टूर्नामेंट में विनोद कांबली के साथ 664 रन की साझेदारी करके उन्होंने अपनी प्रतिभा की बानगी पेश कर दी थी। कांबली तेजी से उभरे और चले भी गए जबकि तेंदुलकर का सितारा इस कदर चमका कि उसके नूर से क्रिकेट जगत रोशन हो गया।

भाई अजित की हौसलाअफजाई और गुरु रमाकांत आचरेकर की शिक्षा ने उन्हें तराशकर परिपक्वता के सांचे में ढाला। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहला कदम रखते ही वकार यूनुस के बाउंसर से उनकी नाक में से खून बहने लगा, लेकिन 16 साल का यह बच्चा डरा तक नहीं। अगले दो दशक में उसने शोएब अख्तर से लेकर शेन वॉर्न तक दुनिया के हर गेंदबाज की इस कदर धुनाई कर डाली कि उनके सपनों में भी वह नजर आने लगे।

इंग्लैंड के खिलाफ अगले साल ओल्ड ट्रैफर्ड में पहला टेस्ट शतक जड़ने वाले तेंदुलकर ने ऑस्ट्रेलिया के 1991-92 दौरे पर सिडनी और पर्थ में शतक जमाए। इसके बाद तो रिकॉर्ड बनते ही गए। आलम यह है कि बल्लेबाजी का कोई रिकॉर्ड शायद सचिन से महफूज नहीं रहा है। टेस्ट क्रिकेट में ब्रायन लारा के नाबाद 400 रन और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में नाबाद 501 रन की पारी के रिकॉर्ड को छोड़कर बल्लेबाजी का लगभग हर बड़ा रिकॉर्ड तेंदुलकर के नाम है।
     
टीम के लिए खेलने वाले तेंदुलकर ने टी-20 क्रिकेट में युवाओं को मौका देने के लिए खुद को पीछे कर लिया। टी-20 में वह सिर्फ आईपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए खेलते हैं।
    
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 1999 में सर डॉन ब्रैडमैन से मुलाकात रही जब उन्होंने कहा कि सचिन में उन्हें अपना अक्स नजर आता है।

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